निजी कंपनियों से यूपी पॉवर कार्पोरेशन फिलहाल बिजली

यूपी में निजी कंपनियों से बिजली खरीद के प्रस्ताव पर रोक

यूपी में निजी कंपनियों से बिजली खरीद के प्रस्ताव पर रोक

विद्युत नियामक आयोग ने पॉवर कार्पोरेशन के प्रस्ताव के औचित्य पर उठाये सवाल

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश में निजी कंपनियों से यूपी पॉवर कार्पोरेशन फिलहाल बिजली नहीं खरीद सकेगी। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने निजी कंपनियों से बिजली खरीदने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए पावर कार्पोरेशन के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।

यूपी पॉवर कार्पोरेशन ने निजी कंपनियों से तीन हजार मेगावाट बिजली खरीदने को लेकर नियामक आयोग के समक्ष आवेदन किया था। आयोग ने कार्पोरेशन से बिजली खरीद संबंधी पूरा ब्यौरा तलब करते हुए पूछा है कि इसका औचित्य क्या है ? नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन के समझौता पत्र की अनुमति पर रोक लगा दी है।

पावर कार्पोरेशन के सूत्रों के अनुसार प्रदेश में दो साल के अंदर 21 हजार मेगावाट बिजली खरीद संबंधी समझौता पत्र तैयार किए गए हैं। इसमें कुछ की टेंडर प्रक्रिया चल रही है तो कुछ लंबित हैं। इसी बीच पॉवर कार्पोरेशन ने नियामक आयोग में एक हजार मेगावाट मध्यम पीक समर और दो हजार लांग टर्म पीक समर के लिए खरीद संबंधी समझौता पत्र पेश किया और खरीद के लिए अनुमति मांगी।

नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने पावर कार्पोरेशन के प्रस्ताव पर सुनवाई के बाद निजी कंपनियों से बिजली खरीद के समझौता पत्र पर रोक लगा दी है। साथ ही आयोग ने अब तक बिजली खरीद के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव, प्रक्रिया, जरूरत सहित सभी पहलुओं पर भी कार्पोरेशन से जवाब तलब किया है।

नियामक आयोग ने पूछा है कि पहले पावर कार्पोरेशन बताए कि इस खरीद का औचित्य क्या है? बिजली खरीद के लिए स्पष्ट योजना क्या है? इसके लिए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी की स्वीकृत ली गई है या नहीं। आयोग ने साफ कहा है कि पूरे मामले में पर्याप्त योजना और समुचित विस्तृत कार्ययोजना बनाकर आयोग के सामने प्रस्तुत की जाए। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि किन निजी कंपनियों से बिजली खरीद की योजना है। 

बिजली खरीद मामले पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 25 साल के लिए 21 हजार मेगावाट बिजली खरीदी जा रही है। निश्चित तौर पर यह सरकारी धन की बंदरबांट है। मनमानी तरीके से प्रदेश में बिजली खरीद की जरूरत क्यों पड़ रही है। 

पावर कार्पोरेशन के खरीद समझौता पत्र पर रोक लगाने का आदेश जारी होते ही पावर कार्पोरेशन में हलचल मच गई है। कार्पोरेशन के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यूपी में राज्य की विद्युत उत्पादन इकाईयां मांग को पूरा करने में सक्षम हैं। परन्तु कभी मरम्मत के नाम पर, कभी कोयले की कमी बताकर तो कभी अन्य कारण दिखाकर उत्पादन निगम की इकाइयों को बंद रखा जाता है। इन परिस्थितियों में कृत्रिम अभाव दिखाकर राज्य में अक्सर निजी कंपनियों से बिजली की खरीद होती है। इसका नुकसान राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है क्योंकि निजी कंपनियों से खरीदी जाने वाली मंहगी बिजली का बोझ उन्हें ही उठाना पड़ता है।

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