सितंबर में शहरी युवाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 19% हुई, महिलाओं की स्थिति चिंताजनक: MoSPI
नई दिल्ली। देश के शहरी इलाकों में युवाओं के लिए रोजगार का संकट गहराता दिख रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी 'पीरियडिक लेबर फोर्स सर्वे' (PLFS) के सितंबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, 15 से 29 वर्ष की आयु के शहरी युवाओं में बेरोजगारी दर बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई है। इसमें भी शहरी युवतियों की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहाँ बेरोजगारी दर बढ़कर 26.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।
मई से लगातार बढ़ रही है बेरोजगारी
मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी युवाओं में बेरोजगारी मई महीने (17.5%) के बाद से लगातार बढ़ रही है। अगस्त में यह दर 18.7 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई।
अगर लिंग-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो शहरी युवतियों की बेरोजगारी दर 26.4 प्रतिशत से बढ़कर 26.6 प्रतिशत हो गई है। वहीं, शहरी पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 16.2 प्रतिशत से बढ़कर 16.4 प्रतिशत पहुंच गया है।
राष्ट्रीय और ग्रामीण स्तर का हाल
राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं की बेरोजगारी दर में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है और यह 15.1 प्रतिशत से बढ़कर 15.2 प्रतिशत हो गई। इसके विपरीत, ग्रामीण युवाओं के बीच बेरोजगारी दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जो 13.3 प्रतिशत से घटकर 13.2 प्रतिशत रह गई है।
कार्यबल भागीदारी में हुआ सुधार
एक तरफ जहाँ युवाओं की बेरोजगारी बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में कुल शहरी कार्यबल भागीदारी (Workforce Participation) में सुधार दर्ज किया गया है। सभी लिंगों के मामले में शहरी कार्यबल भागीदारी में मजबूती आई है।"
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)
शहरी वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR) अगस्त के 47 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 47.2 प्रतिशत हो गया है, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। इसी तरह, शहरी महिलाओं की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) भी 0.5 प्रतिशत अंक बढ़कर 25.9 प्रतिशत पर पहुंच गई। हालांकि, 15+ आयु वर्ग की शहरी महिलाओं में समग्र बेरोजगारी दर भी 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत हुई है।
देश की कुल बेरोजगारी दर स्थिर
पूरे देश की बात करें तो भारत की समग्र बेरोजगारी दर (15+ वर्ष) सितंबर में 5 प्रतिशत पर स्थिर रही, जो कि पिछले साल इसी अवधि (सितंबर 2025) में 5.2 प्रतिशत थी। सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार, यह अनुमान पूरे भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के 3,70,513 लोगों के व्यापक सर्वेक्षण पर आधारित हैं।
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