अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बाद भी भारत के वित्ती

US मिडटर्म चुनाव के बाद भी भारत पर तेल की महंगाई का खतरा बरकरार: रिपोर्ट

US Midterms Won’t Ease India Oil Risks

नई दिल्ली: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बाद भी भारत के वित्तीय बाजारों पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का दबाव बना रह सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित जीत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। ब्रोकरेज का मानना है कि 3 नवंबर को होने वाले चुनाव के बाद ईरान के साथ संघर्ष फिर बढ़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और भारत के भुगतान संतुलन (BOP), विदेशी मुद्रा बाजार और शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है।

ईरान पर अमेरिकी हमले से बढ़ सकते हैं तेल के दाम

एमके ग्लोबल ने कहा, "हमारा मानना है कि मिडटर्म चुनावों के बाद तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना नहीं है।" ब्रोकरेज ने चेतावनी दी कि ईरान पर अमेरिका के नए हमले की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव का भारत के बाजारों पर सीधा राजनीतिक असर पड़ने के बजाय भू-राजनीतिक प्रभाव अधिक हो सकता है। डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजारों के लिए प्रमुख कारक बने रहेंगे। राजनीतिक मोर्चे पर एमके ग्लोबल को उम्मीद है कि डेमोक्रेट्स अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। वहीं, सीनेट में बहुमत हासिल करने की उनकी संभावनाएं भी बेहतर हुई हैं। रिपोर्ट में अलग-अलग चुनावी नतीजों की संभावनाएं इस तरह बताई गई हैं:

  • * डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में जीत हासिल करने की 60 प्रतिशत संभावना।
  • * डेमोक्रेट्स के हाउस पर नियंत्रण हासिल करने और रिपब्लिकन के सीनेट में बहुमत बनाए रखने की 30 प्रतिशत संभावना।
  • * रिपब्लिकन के दोनों सदनों पर नियंत्रण बनाए रखने की 10 प्रतिशत संभावना।

 ट्रंप की टैरिफ और इमिग्रेशन नीतियों पर बढ़ सकती है जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होता है, तो ट्रंप की टैरिफ और इमिग्रेशन नीतियों की जांच तेज हो सकती है। हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि टैरिफ नीतियों पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि व्यापार और विदेश नीति के मामलों में अमेरिकी राष्ट्रपति के पास व्यापक कार्यकारी अधिकार हैं। एमके ग्लोबल ने इस धारणा से भी सावधान किया है कि राजनीतिक गतिरोध अपने आप अमेरिकी शेयर बाजार में लगातार तेजी की वजह बनेगा। ऐतिहासिक रूप से S&P 500 ने मिडटर्म चुनावों के बाद 60 कारोबारी दिनों में औसतन करीब 6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा परिस्थितियां पहले जैसी अनुकूल नहीं हैं। पिछले छह महीनों में अमेरिकी शेयर बाजार पहले ही करीब 12 प्रतिशत चढ़ चुका है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची है और ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

डॉलर और कच्चे तेल में गिरावट से भारत को मिल सकती है राहत

भारत के संदर्भ में ब्रोकरेज ने कहा कि डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से घरेलू बाजार को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि मौजूदा हालात में भारत को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में अमेरिकी चुनाव के बाद भारतीय बाजारों में तेजी की उम्मीद लंबे समय तक टिकने की गारंटी नहीं है।

रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग रहेगा मजबूत

रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा, तकनीक और चीन से जुड़े मुद्दों पर भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग मजबूत बना रह सकता है। इसकी वजह दोनों अमेरिकी राजनीतिक दलों का इन महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को समर्थन देना है।

(ANI)

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