अमेरिका में डेटा सेंटरों के कारण तेजी से बढ़ेगी बिजली की मांग, S&P Global रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
नई दिल्ली। S&P Global की एक ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अमेरिका में हाइपरस्केल डेटा सेंटरों के तेजी से हो रहे विस्तार के कारण बिजली की मांग में भारी तेजी आ रही है। दशकों तक बिजली की खपत लगभग स्थिर रहने के बाद अब यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के अनुमानों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2028 तक देश में बिजली उत्पादन क्षमता में 5 प्रतिशत से अधिक की सालाना चक्रवृद्धि दर से वृद्धि होने की पूरी उम्मीद है।
बिजली कंपनियों के लिए नए अवसर
यह बढ़ती मांग अमेरिकी बिजली कंपनियों यानी यूटिलिटी सेक्टर के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आई है। अधिक खपत से कंपनियों को विनियमित दरों के जरिए लागत वसूलने में होने वाली देरी की भरपाई करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे उनके वित्तीय प्रदर्शन और क्रेडिट क्वालिटी को भी मजबूत सहारा मिलेगा।
बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली कंपनियां नियामकों के साथ मिलकर बड़े उपभोक्ताओं के लिए विशेष टैरिफ तैयार करने पर काम कर रही हैं। ये सार्वजनिक टैरिफ अधिक पारदर्शिता लाते हैं, हालांकि इनके प्रावधान अलग-अलग ऑपरेटरों के निजी समझौतों से भिन्न हो सकते हैं।
केंद्रित ग्राहक आधार का जोखिम
एसएंडपी ग्लोबल ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि केवल एक ही उद्योग और कुछ चुनिंदा बड़े ग्राहकों पर अत्यधिक निर्भर रहना अपने साथ काफी बड़े वित्तीय जोखिम लेकर आता है।
सार्वजनिक टैरिफ में विभिन्न श्रेणियों के लिए शुल्क तय होते हैं, लेकिन हाइपरस्केल ऑपरेटरों के साथ हुए निजी अनुबंधों में अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान होते हैं। यही वजह है कि केवल टैरिफ के आधार पर कुल जोखिम का सटीक आकलन करना एक कठिन चुनौती बना हुआ है।
दीर्घकालिक समझौते और सुरक्षा शर्तें
रिपोर्ट के मुताबिक बड़े लोड वाले टैरिफ में आमतौर पर बिजली कंपनियों और डेटा सेंटर ऑपरेटरों के बीच कम से कम 12 साल और अधिकतम 20 साल तक के दीर्घकालिक समझौते शामिल होते हैं।
इन समझौतों में न्यूनतम भुगतान की कड़ी शर्तें होती हैं जो औसतन निश्चित लागतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा कवर करती हैं। इसके अलावा वित्तीय नुकसान से बचाव के लिए टर्मिनेशन फीस और कॉलेटरल प्रावधान भी जोड़े जाते हैं।
यदि किसी हाइपरस्केल कंपनी की क्रेडिट रेटिंग 'ए माइनस' से नीचे गिर जाती है, तब भी सुरक्षा के ये तमाम प्रावधान तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। हालांकि कंपनियों के नियम अलग हो सकते हैं, फिर भी यह व्यवस्था वित्तीय जोखिमों को नियंत्रित करने में मददगार साबित होती है।
नियामक मंजूरी की प्रक्रिया जारी
रिपोर्ट के अंत में यह भी रेखांकित किया गया है कि अभी भी कई बिजली कंपनियां अपने लार्ज-लोड टैरिफ के लिए विनियामक अनुमोदन यानी रेगुलेटरी अप्रूवल प्राप्त करने की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं। (इनपुट: ANI)
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