गणेशोत्सव पूरे भारत में अपार उत्साह के साथ मनाया ज

गणेश पंडाल की सजावट.. देश भर में उमड़ा जनसैलाब

खेतराबाद पंडाल

नकुल जैन, नोएडा

गणेशोत्सव आते ही पूरे देश में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है.. बप्पा के दर्शन करने के लिए श्रद्दालुओं की भी भारी भीड़ उमड़ती है..इस पर्व पर गणेश वंदना के लिए सजने वाले पंडाल आकर्षण का केंद्र बनते हैं...पंडालकी भव्यता भी एक वजह है,,जो लोगों को यहां पर आने पर मजबूर कर देती है..वहीं श्रद्दालुओं भी इस त्यौहार की रौनक के चलते साल भर बेसब्री से इंतजार करते है..और गणेशोत्सव आने पर मस्ती से झूम उठते हैं..वैसे गणेशोत्सव को लेकर हमेशा मुंबई के ही पंडाल का ही जिक्र किया जाता है..लेकिन इस साल हम गणेशोत्सव पर कुछ अलग करने के लिए आपको दूसरे शहरों के पंडाल की सैर कराते हैं...और जानकारी देते हैं कि क्या है उन पंडाल में खास..जो उन्हें अलग बनाता है...

संतोष पंडाल त्यौहारों का सीजन आता है..दुर्गा पूजा की बात चलती है..तो सबसे पहला ख्याल लोगों को कोलकाता का आता है..लेकिन आज हम कोलकाता की दुर्गा पूजा नहीं ब्लकि गणेशोत्सव का जिक्र करने जा रहे हैं..यहां पर कुछ सालों से दुर्गा पूजा के साथ गणेशोत्सव पर भी मनमोहक पंडाल सजाए जाते हैं..जिनकी रौनक देखकर आदमी दो घड़ी ठहरकर पांडालों को बड़े ध्यान के साथ देखने पर मजबूर हो जाता है..और उसकी सुंदरता में न जाने कहां खो जाता है..वहीं कोलकाता के सबसे खास पंडाल की बात की जाए तो संतोष पंडाल को इस शहर का सबसे आकर्षक पंडाल माना जाता है..भगवान गणेश का यह पांडाल अपनी क्रिएटीवीटी के लिए पूरी दुनिया भर में प्रसिद्द है..इस पंडाल को बनाने की कला.. शिल्पकला का एक अद्भुत नमूना है..इस पंडाल में मूर्तियों की डिजाइनिंग को लेकर खास ध्यान दिया जाता है..कम शब्दों और सरल भाषा में कहें तो कोलकाता का संतोष पंडाल पारंपरिक और आधुनिक कला का अनूठा संगम है..

खैतराबाद गणेश पंडाल तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में भी गणेशोत्सव को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है..हजारों की तादाद में यहां पर भी गणेश पंडाल में भीड़ उमड़ती है..प्रदेश की राजधानी में इस त्यौहार को उत्साह के साथ- साथ एक अनूठे अंदाज में भी मनाया जाता है..आपको बता दें कि हैदराबाद के खैतराबाद में लगभग 70 फीट उंची भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है..जो इस शहर में पूरे 10 दिन आकर्षण का केंद्र बनी रहती है..वहीं इस मूर्ति के भव्य और विशाल होने के चलते..दूर दूर से यहां श्रद्दालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं..और दर्शन कर उत्साह में सराबोर हो जाते हैं..वहीं विसर्जन के दौरान इस विशाल प्रतिमा की एक अनोखे अंदाज में शोभायात्रा भी निकाली जाती है.. शोभायात्रा के दौरान सड़कों पर इतना भारी जाम लग जाता है कि कई मील दूर तक देखने पर भी सिर्फ आदमी ही नजर आते हैं..

दगदुसेठ हलवाई पंडाल  महाराष्ट्र के पुणे को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत भी कहा जाता है..इस शहर ने अपनी पुरानी परंपरा और रीति-रिवाजों को आज भी जिंदा रखा है..वहीं जब गणेशोत्सव आता है तो ये शहर अपनी परंपराओं के साथ पूरी दुनिया का मिलन कराता है..और महाराष्ट्र की साख बन जाता है..पुणे के दगदुसेठ पंडाल को गणेशोत्सव में दुनिया के सबसे खास और शिक्षाप्रद पंडाल के तौर पर देखा जाता है..पुराने समय में दगदुसेठ हलवाई के द्वारा तैयार करवाए गए इस मंदिर के पंडाल को सबसे धनी पंडाल भी कहा जाता है..इस पंडाल की खासियत है कि.. यहां पर हर साल कुछ न कुछ अलग थीम लाई जाती है..जो कि समाज को जागरुक करने का संदेश देती है...वहीं थीम चयन करने के साथ-साथ इसकी क्रिएटिविटी को लेकर भी खास ध्यान रखा जाता है..जो कि इसकी शोभा को बढ़ाकर खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करती है.. 

लालबागचा राजा पांडाल लालबागचा राजा पांडाल इसके नाम से आपको लग रहा होगा कि हम मुंबई की बात कर रहे हैं..लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है..हां पंडाल की साज सजावट तो ठीक लालबागचा पांडाल मुंबई के जैसी ही है...लेकिन ये मुंबई का पंडाल नही हैं..दरअसल देश की राजधानी दिल्ली में भी हर साल गणेशोत्सव बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है..जगह पंडाल सजाए जाते हैं..और भारी संख्या में श्रदालु दर्शन के लिए आते हैं.. वहीं दिल्ली के खास पंडाल में से एक करोल बाग के पंडाल को भी माना जाता है..जिसकी थीम ज्यों की त्यों मुंबई के लालबाग पंडाल जैसी होती है..जिसके चलते इस पांडाल को दिल्ली का लालबाग भी कहा जाता है..पंडाल की खूबसूरती और रौनक को देखते हुए..यहां पर भक्तों का तांता लगता है..वहीं पूरी राजधानी में इस पंडाल का आकर्षण कुछ अलग ही रहता है..पंडाल में श्रद्दालुओं की भीड़ को देखते हुए खुल्ला और हवादार बनाया जाता है..ताकि यहां पहुंचने वाले लोगों को किसी भी तरह की परेशानी न हो.. वहीं इस पंडाल डाल का विसर्जन भी मुंबई वाले लाल बाग के जैसे ही पूरे जोश और उत्साह के साथ किया जाता है...