Union Bank of India की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर म

सितंबर में 10.6% पहुंच सकती है थोक महंगाई, निकट भविष्य में भी राहत के आसार नहीं: UBI रिपोर्ट

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नई दिल्ली। देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई 10 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है और निकट भविष्य में इसके दो अंकों (डबल डिजिट) में बने रहने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ रुपये में आई कमजोरी और मौसम संबंधी जोखिमों के कारण कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।

Key Highlights / स्टोरी हाईलाइट्स

  • सितंबर में 10% पार होगी थोक महंगाई: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में WPI आधारित महंगाई दर 10.60% तक पहुंच सकती है।
  • सब्जियों और ईंधन में भारी उछाल: सब्जियों की कीमतों में 15.18% और क्रूड/नेचुरल गैस की महंगाई में 52.93% तक का बड़ा इजाफा होने का अनुमान है।
  • सुपर अल नीनो और खरीफ बुआई का खतरा: मौसम के जोखिमों और कम बुआई के चलते आने वाले दिनों में खाद्य महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है।
  • खुदरा बाजार पर भी पड़ेगा असर: थोक कीमतों में लगातार तेजी का यह दौर अंततः उपभोक्ताओं के लिए खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़ने का कारण बनेगा।

सालाना आधार पर बड़ा उछाल

अनुमान जताया गया है कि सितंबर में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 10.60 प्रतिशत पर पहुंच सकती है, जो अगस्त में 9.92 प्रतिशत थी। उल्लेखनीय है कि पिछले साल सितंबर में यह दर माइनस 0.20 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई थी। UBI की रिपोर्ट में इस भारी बढ़ोतरी के लिए मुख्य रूप से सब्जियों के ऊंचे भाव, मैन्युफैक्चरिंग लागत में वृद्धि और पिछले साल के खाद्य व ईंधन सूचकांक के निचले आधार (लो बेस) को जिम्मेदार ठहराया गया है।

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है, "निकट भविष्य में WPI के दो अंकों में बने रहने की पूरी संभावना है।" इसके अलावा, बैंक ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए भी थोक महंगाई दर औसतन 10 प्रतिशत के आसपास रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।

सब्जियों और मसालों की कीमतों में आग

खाद्य वर्ग में महंगाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य WPI अगस्त के 7.05 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसमें सब्जियों की कीमतों में सालाना आधार पर 15.18 प्रतिशत का बड़ा उछाल आने का अनुमान है।

केवल मासिक आधार पर देखें तो सितंबर के दौरान सब्जियों के दाम 8.50 प्रतिशत चढ़े हैं। इसके साथ ही मसालों और अन्य प्रसंस्कृत (मैन्युफैक्चर्ड) खाद्य उत्पादों में भी महंगाई दर दहाई के आंकड़े में बनी हुई है।

सुपर अल नीनो और खरीफ की धीमी बुआई का खतरा

रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि 'सुपर अल नीनो' की स्थिति और खरीफ फसलों की धीमी बुआई के चलते आने वाले दिनों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए ये कारक खाद्य महंगाई के परिदृश्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर रहे हैं।

ईंधन और कच्चे तेल में भारी उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया तेजी के चलते ईंधन WPI अगस्त के 22.96 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 24.45 प्रतिशत होने का अनुमान है। वहीं, क्रूड पेट्रोलियम और नेचुरल गैस की महंगाई दर में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जो एक महीने पहले के 34.41 प्रतिशत से बढ़कर 52.93 प्रतिशत पर पहुंच सकती है।

कोर WPI का सबसे बड़ा योगदान

खाद्य और ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं की महंगाई दर्शाने वाली 'कोर WPI' दर भी अगस्त के 8.56 प्रतिशत से बढ़कर 9 प्रतिशत होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य थोक महंगाई में कोर महंगाई का ही सबसे बड़ा योगदान रहा है, जिसका सितंबर के आंकड़ों में अनुमानित योगदान 543 बेसिस पॉइंट्स दर्ज किया गया है।

खुदरा कीमतों पर भी दिखेगा असर

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने चेतावनी दी है कि यदि थोक महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो अंततः इसका असर खुदरा महंगाई (Retail Prices) पर भी पड़ेगा। कंपनियां अपनी बढ़ी हुई लागत का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालना शुरू करेंगी।

रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है, "WPI का लगातार ऊंचे स्तर पर बने रहना इस बात का संकेत है कि यह तेजी अंततः खुदरा बाजार तक पहुंचेगी।" इसके अलावा, सर्दियों में होने वाली बेमौसम बारिश और वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनावों के गहराने से महंगाई के आंकड़ों में और उछाल आने का खतरा बना हुआ है।

Impact Analysis / Smart FAQ Block (प्रभाव विश्लेषण)

Q1: क्या थोक महंगाई के बढ़ने से आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा? उत्तर: हाँ, इसका सीधा और गहरा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि जब थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में लगातार तेजी बनी रहती है, तो कंपनियां बढ़ी हुई इनपुट लागत का बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर डालती हैं। इससे खाने-पीने की वस्तुएं, तेल और दैनिक उपयोग का सामान खुदरा बाजार में और अधिक महंगा हो सकता है।

Q2: महंगाई के इस दौर में खाद्य और ईंधन सेक्टर की क्या स्थिति है? उत्तर: खाद्य और ईंधन दोनों ही मोर्चों पर हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सितंबर में खाद्य WPI बढ़कर 7.90% होने का अनुमान है, जिसमें सब्जियों की कीमतें 15% से ज्यादा बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और 'सुपर अल नीनो' तथा खरीफ फसलों की सुस्त बुआई के कारण खाद्य व ऊर्जा संकट के और गहराने की आशंका है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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