यम देवता का पूजन और दीपदान, खत्म होता है अकाल मृत्यु का डर
Madhya Pradesh : कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी पर नरक चौदस और रूप चतुर्दशी का पर्व मानाया जाता है। जानकार बताते हैं कि यह 19 अक्टूबर को दोपहर 1.41 बजे शुरू होगा। इसके साथ समापन 20 अक्टूबर को 2,39 बजे होगा। नरक चतुर्दशी, रुप चौदस, यमदीप दान 19 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन यम देवता की पूजा और दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। इसके साथ व्यक्ति के परिवेश में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
20 को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। जानकार बताते हैं कि नरक चतुर्दशी की पूजा में यम दीपक को प्रज्व्वलित करना विशेष होता है। इस दीपक को विशेष नियम से जलाया जाता है। माना जाता है कि दीपक हमेशा दक्षिण दिशा में ही जलाना चाहिए। यह यमराज की दिशा मानी जाती है। चौमुखी मिट्टी का दीपक शभ होता है। इसमें सरसों का तेल और चार बत्तियां होती हैं, जो जीवन में चार दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक है।
पौराणिक कथा
राक्षस नरकासुर ने तीनों लोकों में अपने आत्याचार से आतंक मचा रखा था। इससे मनुष्य के साथ-साथ देवता भी परेशान थे। इसी दिन, चतुर्दशी के दिन ही भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और 16 000 कन्याओं को बंधन से मुक्त किया था। इसलिए इसी दिन नरक चतुर्दशी या रूप चौदस का त्योहार मनाया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत और प्रकाश फैलाने का भी प्रतीक है। इस दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है। नर्मदा तट गौरीघाट में जगमगाएंगे 51 हजार दीपक। आज के दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व है।
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