तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिख

डेंगू से रहें सावधान: तेज बुखार से लेकर शरीर में दर्द तक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

Dengue Alert: Know the Symptoms, Warning Signs and Prevention Tips

नई दिल्ली (भारत)। मानसून और बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के साथ डेंगू का खतरा भी बढ़ जाता है। डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलती है। यह मच्छर सामान्यतः दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, डेंगू दुनिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है। अधिकांश मरीज सामान्य उपचार और निगरानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर डेंगू का रूप ले सकता है, जो जानलेवा भी हो सकता है।

क्या है डेंगू?

डेंगू वायरस से होने वाली बीमारी है। इसके चार प्रमुख सीरोटाइप DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4 माने जाते हैं। संक्रमित व्यक्ति को मच्छर काटने के बाद वह मच्छर वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता है। डेंगू होने पर कई लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते या बीमारी हल्की रहती है। जिन लोगों में लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें आमतौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।

कैसे पहचानें डेंगू?

डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 4 से 10 दिन बाद दिखाई दे सकते हैं और सामान्यतः 2 से 7 दिनों तक रह सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं

  • अचानक तेज बुखार
  • तेज सिरदर्द
  • आंखों के पीछे दर्द
  • मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
  • शरीर में अत्यधिक कमजोरी या थकान
  • मतली और उल्टी
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • कुछ मामलों में ग्रंथियों में सूजन

हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। डेंगू की पुष्टि के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक रक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है।

बुखार उतरने पर भी रहें सतर्क

डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होना हमेशा बीमारी से पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत कई बार बुखार उतरने के आसपास या उसके बाद दिखाई देते हैं। WHO के अनुसार, बीमारी के इस चरण में विशेष निगरानी जरूरी है।

ये संकेत दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं

  • पेट में तेज दर्द या पेट दबाने पर अधिक दर्द
  • लगातार उल्टी
  • नाक या मसूड़ों से खून आना
  • उल्टी या मल में खून
  • बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी
  • तेजी से सांस लेना
  • अत्यधिक प्यास लगना
  • त्वचा का पीला, बहुत फीका या ठंडा पड़ना
  • अचानक हालत बिगड़ना

ऐसे लक्षण गंभीर डेंगू की ओर संकेत कर सकते हैं और तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।

डेंगू से बचने के लिए क्या करें?

डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचना और उनके प्रजनन स्थल को खत्म करना है।

घर में पानी जमा न होने दें: कूलर, गमले, बाल्टी, पुराने टायर, बोतल, डिब्बे और छत पर रखे ऐसे सामान में पानी जमा न होने दें, जहां मच्छर पनप सकते हैं।

पानी की टंकियों को ढककर रखें: खुले पानी के कंटेनर मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकते हैं। इन्हें अच्छी तरह ढककर रखें।

सप्ताह में कम से कम एक बार सफाई करें: जिन बर्तनों में पानी जमा होता है, उन्हें केवल खाली करना ही नहीं बल्कि अच्छी तरह साफ और रगड़कर धोना भी जरूरी है, क्योंकि मच्छर के अंडे कंटेनर की सतह पर चिपके रह सकते हैं।

शरीर को ढककर रखें: खासकर दिन के समय पूरी बांह के कपड़े और शरीर को अधिक ढकने वाले कपड़े पहनना उपयोगी है।

मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं: मच्छररोधी रिपेलेंट, खिड़की-दरवाजों पर जाली और जरूरत के अनुसार मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। WHO के अनुसार DEET, Picaridin/Icaridin या IR3535 वाले रिपेलेंट प्रभावी विकल्पों में शामिल हैं।

दिन में भी सावधानी बरतें: डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर दिन में काट सकता है। इसलिए सिर्फ रात में मच्छर से बचाव करना पर्याप्त नहीं है। घर, स्कूल और कार्यस्थल हर जगह मच्छर नियंत्रण जरूरी है।

डेंगू होने पर क्या करें?

डेंगू के लिए फिलहाल कोई ऐसी विशेष दवा नहीं है जो सीधे वायरस को खत्म कर दे। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने, पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी न होने देने पर केंद्रित रहता है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल का इस्तेमाल बुखार और दर्द के लिए किया जा सकता है। डेंगू की आशंका में एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं खुद से न लें, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

प्लेटलेट्स को लेकर न करें घबराहट

डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जाती। मरीज की पूरी स्थिति, रक्तस्राव, शरीर में पानी की स्थिति और अन्य चिकित्सकीय संकेतों को देखकर डॉक्टर उपचार तय करते हैं। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए घरेलू नुस्खों या दवाओं पर निर्भर नहीं होना चाहिए।

बचाव में पूरी कॉलोनी की भूमिका जरूरी

डेंगू की रोकथाम केवल एक घर तक सीमित नहीं है। यदि एक घर साफ है लेकिन आसपास पानी जमा है, तो मच्छरों का प्रजनन जारी रह सकता है। इसलिए मोहल्लों में नियमित रूप से कूलर, गमले, नालियां, छतों और खाली पड़े कंटेनरों की जांच करना जरूरी है. WHO भी डेंगू नियंत्रण में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने और सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण मानता है।

डेंगू से बचाव के 10 आसान नियम

  • पानी जमा न होने दें।
  • कूलर की नियमित सफाई करें।
  • पानी की टंकियों को ढककर रखें।
  • गमलों की ट्रे में पानी न जमा होने दें।
  • पुराने टायर और खाली डिब्बे हटाएं।
  • दिन में भी मच्छररोधी उपाय अपनाएं।
  • पूरी बांह के कपड़े पहनें।
  • जरूरत पड़ने पर मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
  • तेज बुखार और अन्य लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
  • पेट दर्द, लगातार उल्टी या रक्तस्राव जैसे चेतावनी संकेतों पर तुरंत अस्पताल जाएं।

डेंगू से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सावधानी

डेंगू से बचाव का सबसे बड़ा हथियार सावधानी और मच्छरों के प्रजनन पर रोक है। घर और आसपास पानी जमा न होने देना, दिन में भी मच्छरों से बचाव करना और बुखार के दौरान चेतावनी संकेतों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान और उचित चिकित्सकीय देखभाल गंभीर डेंगू के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(Disclaimer यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। डेंगू की आशंका होने पर स्वयं निदान या दवा लेने के बजाय चिकित्सक से जांच और उपचार की सलाह लें।)

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