कानों की सेहत रखें सुरक्षित, अपनाएं सही आदतें और रहें सुनने की समस्याओं से दूर
नई दिल्ली (भारत)। आजकल तेज आवाज, लंबे समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल, कानों की गलत सफाई और संक्रमण जैसी वजहों से कानों की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी और सही आदतें अपनाकर कानों से जुड़ी कई समस्याओं से बचा जा सकता है। समय रहते देखभाल करने से न केवल संक्रमण का खतरा कम होता है, बल्कि सुनने की क्षमता भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।
कानों का रखें विसेश ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक तेज आवाज में रहने या तेज वॉल्यूम पर संगीत सुनने से कानों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए ईयरफोन का उपयोग करते समय आवाज को मध्यम रखें और लगातार एक घंटे से अधिक उपयोग करने से बचें। शोर वाले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को ईयरप्लग या ईयरमफ जैसे सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। कानों की सफाई करते समय कॉटन बड, हेयरपिन, माचिस की तीली या किसी भी नुकीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है। यदि कान में अधिक मैल जमा हो जाए तो स्वयं निकालने के बजाय ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
कानों की बीमारियों से बचाव के आसान टिप्स
- तेज आवाज में लंबे समय तक संगीत सुनने से बचें।
- ईयरफोन का वॉल्यूम 60 प्रतिशत से अधिक न रखें और हर 60 मिनट बाद कुछ देर का ब्रेक लें।
- कानों में किसी भी तरह की नुकीली वस्तु या कॉटन बड न डालें।
- नहाने या तैराकी के बाद कानों को अच्छी तरह सुखाएं।
- सर्दी-जुकाम या गले के संक्रमण का समय पर इलाज कराएं, क्योंकि इसका असर कानों पर भी पड़ सकता है।
- धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाए रखें।
- संतुलित आहार लें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- साल में कम से कम एक बार ईएनटी विशेषज्ञ से कानों की जांच जरूर करवाएं।
समय-समय पर कराएं कानों की जांच
यदि कान में दर्द, मवाद आना, सुनाई कम देना, घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देना या बार-बार चक्कर आने जैसी समस्या हो तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है, कि कानों की नियमित देखभाल, सही जीवनशैली और छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर अधिकांश कान संबंधी बीमारियों से बचाव संभव है। स्वस्थ आदतें अपनाकर आप अपनी सुनने की क्षमता को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं।
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