स्वाइन फ्लू से कैसे बचें? जानें बचाव के उपाय और संक्रमित होने पर क्या करें
नई दिल्ली (भारत)। बरसात और बदलते मौसम में फ्लू जैसे सांस के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाने वाला H1N1 अब मौसमी इन्फ्लुएंजा का हिस्सा माना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों और दूषित हाथों के संपर्क से फैल सकता है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
इसमें अचानक बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, थकान तथा नाक बहना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह सामान्य फ्लू से काफी अलग है।
संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?
- नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं और हाथ अच्छी तरह सुखाएं।
- खांसते या छींकते समय मुंह-नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकें।
- इस्तेमाल किए गए टिश्यू को उचित तरीके से फेंकें।
- बीमार व्यक्ति के बेहद करीब जाने से बचें।
- आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें।
- खुद बीमार महसूस कर रहे हों या बुखार हो तो घर पर रहें और दूसरों से दूरी रखें।
- भीड़भाड़ या बंद जगहों में संक्रमण का खतरा अधिक होने पर मास्क जैसे सुरक्षात्मक उपाय उपयोगी हो सकते हैं।
फ्लू वैक्सीन भी है बचाव का महत्वपूर्ण तरीका
WHO के अनुसार इन्फ्लुएंजा से बचाव और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए वार्षिक फ्लू वैक्सीन सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कुछ पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में टीकाकरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। वैक्सीन लगवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
अगर स्वाइन फ्लू हो जाए तो क्या करें?
हल्के लक्षण होने पर पर्याप्त आराम करें, पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहें तथा बुखार जैसे लक्षणों के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार लें। संक्रमण फैलने से रोकने के लिए घर पर रहना और दूसरों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। अधिकांश लोगों में फ्लू लगभग एक सप्ताह में ठीक हो सकता है।
डॉक्टर की सलाह से लें दवा
कुछ मरीजों, खासकर गंभीर लक्षण वाले या अधिक जोखिम वाले लोगों में डॉक्टर एंटीवायरल दवा दे सकते हैं। इन दवाओं का लाभ लक्षण शुरू होने के शुरुआती 48 घंटों में अधिक हो सकता है, इसलिए लक्षण गंभीर हों तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना चाहिए।
किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
छोटे बच्चों, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं तथा पुरानी बीमारियों या कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
एंटीबायोटिक खुद से न लें
इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाली बीमारी में एंटीबायोटिक सीधे वायरस का इलाज नहीं करती। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है।
जरूरी सलाह: सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार बिगड़ती हालत, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में लक्षणों को हल्के में न लें।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लें।)
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