जन्माष्टमी पर श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्रीकृष्ण

जन्माष्टमी पर करें श्रीकृष्ण के इन 11 मंत्रों का जाप, मन को मिलेगी शांति

Chant These 11 Lord Krishna Mantras on Janmashtami for Peace and Positivity

नई दिल्ली (भारत)। भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, करुणा, ज्ञान और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी के दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप से लेकर योगेश्वर स्वरूप तक की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति में सकारात्मक भावनाओं का संचार होता है।

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े 11 मंत्र

जन्माष्टमी पर व्रत, पूजा, भजन-कीर्तन और श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ के साथ मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। हालांकि मंत्रों के प्रभाव को धार्मिक आस्था के रूप में देखना चाहिए। आइए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े 11 ऐसे मंत्र, जिनका जन्माष्टमी पर जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया जा सकता है।

"ॐ कृष्णाय नमः।"

"ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।"

"ॐ गोविंदाय नमः।"

"ॐ गोपालाय नमः।"

"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।"

"ॐ दामोदराय नमः।"

"ॐ देवकीनन्दनाय नमः।"

"ॐ राधायै नमः। ॐ कृष्णाय नमः।"

"कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्।"

"हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।"

"श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे, हे नाथ नारायण वासुदेव।"

यह महामंत्र कृष्ण भक्ति की विभिन्न परंपराओं में विशेष रूप से लोकप्रिय है। जन्माष्टमी पर मंदिरों और धार्मिक आयोजनों में इसका सामूहिक कीर्तन किया जाता है। भक्त इसे भक्ति और नाम-स्मरण के रूप में जपते हैं। इस लोकप्रिय स्तुति में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न नामों का स्मरण किया जाता है। जन्माष्टमी की रात भगवान के जन्मोत्सव के दौरान इसका जाप या गायन भक्तिभाव के साथ किया जा सकता है।

जन्माष्टमी पर मंत्र जाप कैसे करें?

मंत्र जाप के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करें। भगवान श्रीकृष्ण की बाल गोपाल स्वरूप की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर बैठें। इसके बाद कुछ क्षण आंखें बंद करके भगवान का ध्यान करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार किसी एक मंत्र का जाप करें। माला से जाप करने वाले भक्त सामान्यतः 108 बार मंत्र का जाप कर सकते हैं। हालांकि मंत्र जाप की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा, एकाग्रता और शुद्ध भाव माना जाता है। यदि 108 बार जाप करना संभव न हो तो अपनी सुविधा के अनुसार कम संख्या में भी मंत्र का स्मरण किया जा सकता है।

जन्माष्टमी की रात क्यों किया जाता है मंत्र जाप?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात भगवान के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त इस दौरान श्रीकृष्ण के नाम का संकीर्तन करते हैं, शंख और घंटियां बजाते हैं तथा भगवान का अभिषेक कर आरती करते हैं। मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखना और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। श्रीकृष्ण की शिक्षाओं को याद करते हुए सत्य, धर्म और अच्छे कर्मों का संकल्प लेना भी इस पर्व की भावना के अनुरूप माना जाता है।

मंत्र जाप के साथ इन बातों का रखें ध्यान

जन्माष्टमी पर मंत्र जाप करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और एकाग्रता पर ध्यान देना चाहिए। पूजा के दौरान स्वच्छता बनाए रखें और अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत करें। स्वास्थ्य संबंधी किसी परेशानी में उपवास या कठिन धार्मिक नियम अपनाने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

श्रीकृष्ण की भक्ति केवल मंत्र जाप तक सीमित नहीं

भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का वास्तविक अर्थ केवल मंत्र जाप तक सीमित नहीं है। गीता के संदेश के अनुसार अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन करना, दूसरों के प्रति करुणा रखना और फल की चिंता किए बिना अच्छे कर्म करते रहना भी कृष्ण भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार करें जाप

जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य अवतरण की स्मृति में मनाया जाने वाला आस्था और उल्लास का पर्व है। इस दिन श्रीकृष्ण के नाम और मंत्रों का जाप भक्तों को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का माध्यम बनता है। "ॐ कृष्णाय नमः", "ॐ गोविंदाय नमः", "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जैसे सरल मंत्रों से लेकर महामंत्र तक, भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार जाप कर सकते हैं।

गीता उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें

धार्मिक दृष्टि से मंत्र जाप का सबसे बड़ा उद्देश्य भगवान का स्मरण, मन की एकाग्रता और अच्छे विचारों को जीवन में स्थान देना है। इसलिए इस जन्माष्टमी श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करने के साथ उनके गीता उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प भी लें।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

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