देवस्नान पूर्णिमा कल: नववधू की तरह सजा श्रीमंदिर, आज श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद
पुरी: भगवान जगन्नाथ की देवस्नान पूर्णिमा को लेकर पुरी का श्रीजगन्नाथ मंदिर पूरी तरह तैयार है। जगत के नाथ का धाम नववधू की तरह सजा हुआ है। विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के चलते आज श्रद्धालुओं के लिए श्रीमंदिर में दर्शन बंद रहे। देवस्नान यात्रा से पहले भगवान के श्रीअंगों की सुरक्षा के लिए परंपरागत और अत्यंत महत्वपूर्ण 'सेनापटा लागी' नीति संपन्न की जा रही है।
देवस्नान यात्रा की तैयारियां पूरी
देवस्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा पहंडी के माध्यम से स्नान मंडप में विराजमान होंगे। इससे पहले दैतापति सेवक भगवान के श्रीअंगों की सुरक्षा के लिए विशेष 'सेनापटा लागी' अनुष्ठान करते हैं। इस दौरान लकड़ी के विशेष टुकड़ों और पवित्र वस्त्रों की सहायता से भगवान के श्रीअंगों को सुरक्षित किया जाता है, ताकि पहंडी के दौरान किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।
भक्तों के कंधों पर विराजते हैं महाप्रभु
धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के प्रेम में स्वयं उनके कंधों पर सवार होकर यात्रा करते हैं। इसी कारण उनके दिव्य विग्रह की सुरक्षा के लिए यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। बउल लकड़ी से बने विशेष कवच और लाल-सफेद वस्त्रों से भगवान के श्रीअंगों को सुरक्षित किया जाता है। यही प्रक्रिया भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा पर भी अपनाई जाती है।
केवल दैतापति सेवक ही करते हैं यह गुप्त अनुष्ठान
'सेनापटा लागी' श्रीजगन्नाथ मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण और गुप्त नीतियों में से एक मानी जाती है। मंदिर की परंपरा के अनुसार इस अनुष्ठान को केवल दैतापति और पति महापात्र सेवक ही संपन्न करते हैं। देवस्नान यात्रा और इसके बाद होने वाली श्रीगुंडिचा यात्रा के दौरान भगवान के श्रीअंगों की सुरक्षा के लिए इस परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है। कल होने वाली देवस्नान पूर्णिमा को लेकर पुरी में भक्ति और उत्साह का माहौल है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दिव्य स्नान के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं।
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