हेरा पंचमी 2026: माता लक्ष्मी की नाराजगी से जुड़ी अनोखी परंपरा, जानिए धार्मिक महत्व
पुरी (ओडिशा)। विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा केवल भव्य रथों और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई ऐसे अनूठे उत्सव भी हैं, जो भगवान और भक्तों के बीच भावनात्मक संबंध को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं। इन्हीं में से एक है- हेरा पंचमी, जिसे रथ यात्रा के पांचवें दिन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान जगन्नाथ और माता लक्ष्मी के बीच प्रेम और दांपत्य स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
गुंडिचा मंदिर जाती हैं मां लक्ष्मी
'हेरा' शब्द का अर्थ है देखना या दर्शन करना, जबकि 'पंचमी' का अर्थ है रथ यात्रा का पांचवां दिन। इस अवसर पर माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को देखने और उन्हें वापस श्रीमंदिर लौटने का संदेश देने के लिए गुंडिचा मंदिर जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर चले जाते हैं। इस यात्रा में माता लक्ष्मी उनके साथ नहीं जातीं और श्रीमंदिर में ही विराजमान रहती हैं।
होते हैं विशेष धार्मिक अनुष्ठान
जब भगवान जगन्नाथ पांच दिनों तक वापस नहीं लौटते, तब माता लक्ष्मी उनकी खोज में एक सुसज्जित पालकी में सवार होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पारंपरिक विधियों का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु इस दिव्य झांकी के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं।
भगवान जगन्नाथ के रथ को तुड़वाती हैं मां लक्ष्मी
हेरा पंचमी की सबसे रोचक परंपरा माता लक्ष्मी की नाराजगी है। मान्यता है, कि भगवान के वापस न आने से माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। अपनी नाराजगी व्यक्त करने के लिए वे भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष के एक हिस्से को तुड़वा देतीं हैं। यह कार्य मां लक्ष्मी के सबसे प्रधान सेवक द्वारा किया जाता है। यह घटना किसी क्रोध का नहीं, बल्कि प्रेम और अपनत्व का प्रतीक मानी जाती है, जो यह दर्शाती है कि रिश्तों में मान-मनुहार भी स्नेह का ही एक रूप है।
रिश्तों की मिठास, सम्मान और प्रेम का प्रतीकः हेरा पंचमी
धार्मिक परंपरा के अनुसार, माता लक्ष्मी एक गुप्त मार्ग से वापस श्रीमंदिर लौट आती हैं। इस पूरे आयोजन को भगवान की दिव्य लीला के रूप में देखा जाता है, जिसमें दांपत्य जीवन की मधुर भावनाएं और पारिवारिक संबंधों की आत्मीयता झलकती है। हेरा पंचमी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में रिश्तों की मिठास, सम्मान और प्रेम का संदेश देने वाला पर्व भी है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु इस अनूठी परंपरा के साक्षी बनते हैं और भगवान जगन्नाथ तथा माता लक्ष्मी की इस दिव्य लीला के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं। यही कारण है कि पुरी रथ यात्रा से जुड़े इस उत्सव का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व आज भी उतना ही जीवंत बना हुआ है।
(Disclaimer:- Prime News इस लेख की पुष्टी नही करता, यह लेख मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)
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