काशी विश्वनाथ मंदिर: बाबा विश्वनाथ के दर्शन से मिलता है मोक्ष का मार्ग
वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। के वाराणसी में गंगा नदी के पवित्र तट पर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में गिना जाता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह मंदिर सनातन धर्म की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है, कि स्वयं भगवान शिव ने काशी को अपना निवास स्थान बनाया था, इसलिए इसे मोक्षदायिनी नगरी भी कहा जाता है।
लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं दर्शन के लिए
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं, जबकि सावन, महाशिवरात्रि और देव दीपावली जैसे पर्वों पर भक्तों की संख्या करोड़ों तक पहुंच जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का उल्लेख शिवपुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्त को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह भी मान्यता है कि काशी में मृत्यु होने पर भगवान शिव स्वयं अपने भक्त के कान में तारक मंत्र का उपदेश देते हैं, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण जीवन के अंतिम पड़ाव में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी में निवास करना शुभ मानते हैं।
गंगा घाट से मंदिर पहुंचना हुआ आसान
इतिहास के अनुसार काशी विश्वनाथ मंदिर ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। समय-समय पर इस मंदिर का निर्माण और पुनर्निर्माण हुआ। वर्तमान मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी में मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था। बाद में पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश चढ़वाया, जिसके कारण इसे स्वर्ण मंदिर के रूप में भी विशेष पहचान मिली। आज मंदिर का भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराता है। हाल के वर्षों में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के निर्माण के बाद मंदिर परिसर पहले की तुलना में कहीं अधिक विस्तृत और सुविधाजनक हो गया है। अब श्रद्धालु गंगा घाट से सीधे मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
दिन की सभी आरतियां होती हैं विशेष
चौड़े मार्ग, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और विशाल परिसर ने यहां आने वाले श्रद्धालुओं का अनुभव और अधिक सुखद बना दिया है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इस धाम की भव्यता और धार्मिक वातावरण से प्रभावित होते हैं। सावन के महीने में काशी विश्वनाथ मंदिर का विशेष महत्व बढ़ जाता है। इस दौरान देशभर से कांवड़िए गंगाजल लेकर बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह मंगला आरती से लेकर रात की शयन आरती तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। भक्त दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। महाशिवरात्रि पर यहां पूरी रात भजन-कीर्तन और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।
सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा
धार्मिक मान्यता के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मंदिर के आसपास स्थित विश्वनाथ गली अपने पारंपरिक प्रसाद, बनारसी मिठाइयों, रुद्राक्ष, धार्मिक पुस्तकों और बनारसी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। हर दिन हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आगमन से स्थानीय व्यापार को भी मजबूती मिलती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा विश्वनाथ के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती। यही कारण है कि हर वर्ग और हर आयु के लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर इस पवित्र धाम में पहुंचते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर आज भी सनातन संस्कृति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
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