नया घर बनवाते समय वास्तु शास्त्र के इन सिद्धांतों

नया घर बनवाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, सुख-समृद्धि के लिए इन नियमों का रखें ध्यान

Know these important things before building a new home

नई दिल्ली। अपना घर बनाना हर व्यक्ति का सपना होता है। घर की मजबूत नींव के साथ-साथ वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों का भी पालन करना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यदि घर का निर्माण सही दिशा और उचित योजना के अनुसार किया जाए, तो परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि वास्तु के साथ-साथ भवन की सुरक्षा, मजबूत निर्माण और स्थानीय भवन नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है।

घर के लिए वर्गाकार या आयताकार भूखंड  शुभ

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के लिए वर्गाकार या आयताकार भूखंड को शुभ माना जाता है। मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। वहीं, पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

रसोई का स्थान अग्नि कोण में

रसोई को दक्षिण-पूर्व दिशा यानी अग्नि कोण में बनाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, मास्टर बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में और बच्चों का कमरा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखने की सलाह दी जाती है। शौचालय के लिए पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना गया है, जबकि उत्तर-पूर्व दिशा में शौचालय बनाने से बचने की बात कही जाती है।

 घर में हो रोशनी और हवा का प्रवेश

वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवेश होना चाहिए। पूर्व और उत्तर दिशा में अधिक खिड़कियां रखने से घर का वातावरण बेहतर बना रहता है। साथ ही, घर के मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान को खुला और हल्का रखने की सलाह दी जाती है।

स्थानीय निर्माण मानकों का पालन करना भी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वास्तु नियमों पर निर्भर रहने के बजाय भवन निर्माण में गुणवत्ता, मजबूत नींव, उचित जल निकासी, अग्नि सुरक्षा, वेंटिलेशन और स्थानीय निर्माण मानकों का पालन करना भी बेहद जरूरी है। इससे घर सुरक्षित, सुविधाजनक और लंबे समय तक टिकाऊ बना रहता है।

(Disclaimer: यह लेख वास्तु शास्त्र से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। Prime News इन दावों की पुष्टि नहीं करता।)

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