साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट, जानिए नागपंचमी से जुड़ी पौराणिक मान्यता
उज्जैन (मध्य प्रदेश)। स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर विराजमान नागचंद्रेश्वर भगवान का मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर के कपाट साल में केवल एक दिन के लिए नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। इस दिन भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
नागपंचमी को नाग देवताओं की विशेष पूजा
धार्मिक मान्यता के अनुसार नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव नाग के आसन पर विराजमान हैं। उनके साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा भी स्थापित है। भगवान शिव के इस स्वरूप का नाग देवता से विशेष संबंध माना जाता है। हिंदू धर्म में सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी यानी नागपंचमी को नाग देवताओं की पूजा का विशेष दिन माना गया है। इसी वजह से इस दिन नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
नागराज तक्षक से जुड़ी है कथा
नागचंद्रेश्वर मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित पौराणिक मान्यता नागराज तक्षक से संबंधित है। कहा जाता है, कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया। इसके बाद तक्षक ने भगवान शिव की शरण में रहने का निर्णय लिया। मान्यता है, कि इसी कथा के कारण नागचंद्रेश्वर भगवान की पूजा का नागपंचमी से विशेष संबंध माना जाता है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है।
24 घंटे के लिए खोले जाते हैं कपाट
नागपंचमी के अवसर पर नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट विशेष रूप से खोले जाते हैं। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु इस दौरान भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं। नागपंचमी का पर्व समाप्त होने के बाद मंदिर के कपाट फिर से साल भर के लिए बंद कर दिए जाते हैं और अगले वर्ष नागपंचमी पर पुनः श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुलते हैं।
देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
नागपंचमी के दिन उज्जैन में नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु महाकालेश्वर मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के साथ नागपंचमी का पर्व धार्मिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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