नवरात्र में मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहन से मिलते हैं शुभ-अशुभ संकेत
नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार, मां दुर्गा हर साल नवरात्रों में अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं और प्रस्थान करती हैं। देवी पुराण के अनुसार, माता के आगमन का वाहन कलश स्थापना की तिथि के दिन पर निर्भर करता है, जबकि विदाई का वाहन दशमी तिथि के दिन के आधार पर तय किया जाता है। इन वाहनों से देश-दुनिया और समाज के लिए कई शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं।
मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान के वाहनः
सोमवार या रविवार: यदि कलश स्थापना इन दिनों में हो, तो मां हाथी पर आती हैं। इसे अच्छी बारिश, भरपूर फसल और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं, अगर विदाई इन्हीं दिनों में हो, तो माता भैंसे पर जाती हैं, जो मृत्यु या दुख का संकेत है।
शनिवार या मंगलवार: इन दिनों में आगमन होने पर मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं, जिसे युद्ध, राजनैतिक उथल-पुथल या प्राकृतिक आपदा का सूचक माना जाता है। यदि प्रस्थान इन दिनों हो, तो माता मुर्गा पर जाती हैं, जिससे कष्टों में वृद्धि होती है।
बुधवार: बुधवार के दिन कलश स्थापना होने पर मां नाव की सवारी करती हैं, जो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने और सफलता का प्रतीक है। यदि प्रस्थान इसी दिन हो, तो माता हाथी पर प्रस्थान करती हैं, जो समृद्धि और वर्षा की ओर इशारा करता है।
गुरुवार या शुक्रवार: इन दोनों वार को आगमन होने पर माता डोली में आती हैं, जो महामारी या अशुभ घटनाओं का संकेत है। यदि विदाई का दिन गुरुवार या शुक्रवार हो, तो माता मनुष्य पर प्रस्थान करती हैं, जिससे समाज में शांति और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
नवरात्रि के दौरान किन नियमों का करें पालन?
माता की कृपा पाने और नौ दिनों तक सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए कुछ खास नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है:
सात्विक आहार: नौ दिनों तक लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन (मांसाहार, शराब) का पूर्ण रूप से त्याग करें।
साफ-सफाई और अनुशासन: पूजा स्थल की प्रतिदिन सुबह-शाम सफाई करें। पूरे घर में पवित्रता बनाए रखें।
कलश स्थापना व अखंड ज्योति: यदि आप घट स्थापना कर रहे हैं, तो दिशा का विशेष ध्यान रखें। कलश को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। अखंड दीपक जलाते समय उसे माता की प्रतिमा या चौकी के ठीक सामने या दाहिनी ओर रखें।
दान और कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराएं और आशीर्वाद लें। इसके अलावे आप चाहें, तो पूरे नवरात्रों में कन्या पूजन कर सकते हैं।
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। प्राइम न्यूज इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
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