भगवान विश्वकर्मा की उत्पत्ति, परिवार और पौराणिक कथा: जानिए उनके माता-पिता और संतानों के बारे में
नई दिल्ली (भारत)। हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण-कला के अधिष्ठाता देवता के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने देवताओं के लिए भव्य महलों, नगरों, भवनों और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था। यही कारण है कि विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर कारखानों, कार्यशालाओं, दुकानों, मशीनों और औजारों की विशेष पूजा की जाती है।
कौन हैं भगवान विश्वकर्मा?
भगवान विश्वकर्मा को हिंदू परंपरा में दिव्य शिल्पकार और वास्तु-कला के देवता माना जाता है। ‘विश्वकर्मा’ नाम का अर्थ व्यापक रूप से ऐसा कर्ता या निर्माता माना जाता है, जो सृष्टि के निर्माण की क्षमता रखता हो। ऋग्वेद में ‘विश्वकर्मा’ नाम का उल्लेख एक व्यापक सृष्टिकर्ता के संदर्भ में मिलता है, जबकि बाद की पौराणिक परंपराओं में विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार के रूप में विशेष रूप से प्रतिष्ठित किया गया। धार्मिक कथाओं में उन्हें ऐसी दिव्य निर्माण-कला का ज्ञाता बताया गया है, जिसके माध्यम से उन्होंने देवताओं के लिए अनेक अद्भुत रचनाएं तैयार कीं।
भगवान विश्वकर्मा का जन्म कैसे हुआ?
भगवान विश्वकर्मा के जन्म को लेकर एक ही कथा सभी ग्रंथों में नहीं मिलती। अलग-अलग पुराणों, वैदिक व्याख्याओं और लोकपरंपराओं में उनके जन्म का अलग-अलग वर्णन मिलता है। एक प्रचलित पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा भगवान वास्तुदेव और माता अंगिरसी के पुत्र हैं।
भगवान विश्वकर्मा का परिवार
लोकप्रिय पौराणिक परंपरा के अनुसार—
पिता: वास्तुदेव माता: अंगिरसी पत्नीः घृताची (सौम्या, कृति और आकृति) पुत्रः विश्वरूप पुत्रीः संज्ञा और छाया
विश्वकर्मा ने किन चीजों का निर्माण किया?
भगवान विश्वकर्मा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता उनके दिव्य निर्माण कार्यों की है। पौराणिक कथाओं में उन्हें देवताओं के लिए कई अद्भुत वस्तुओं और स्थानों का निर्माता बताया गया है।
इनमें प्रमुख रूप से— इंद्र का दिव्य भवन देवताओं के नगर दिव्य महल विभिन्न अस्त्र-शस्त्र आभूषण और उपयोगी वस्तुएं दिव्य रथ लंका कई सारे मंदिर जैसी रचनाओं का उल्लेख अलग-अलग कथाओं में मिलता है।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा क्यों की जाती है?
विश्वकर्मा पूजा मुख्य रूप से निर्माण, शिल्प, तकनीक और काम के साधनों के सम्मान से जुड़ी है। कारखानों में मशीनों की सफाई करके उनकी पूजा की जाती है। दुकानों, वर्कशॉप और निर्माण स्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है। कारीगर, इंजीनियर, मैकेनिक, बढ़ई, लोहार, मशीन ऑपरेटर और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग इस दिन अपने काम के औजारों और मशीनों का पूजन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा से कार्यक्षेत्र में सफलता, कौशल और समृद्धि की कामना पूरी होती है।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)
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