पुरी रथयात्रा: जानिए जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के दिव्य रथों के नाम, रंग और खासियतें
पूरी,(ओडिशा)। विश्व प्रसिद्ध पुरी रथयात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी के रथ सज-धजकर तैयार हो रहे हैं। सनातन परंपरा में इन तीनों रथों का विशेष महत्व है, और इनकी बनावट, रंग, पहियों की संख्या से लेकर इनके घोड़ों तक के अलग-अलग नाम और विशेषताएं होती हैं। आइए जानते हैं महाप्रभु और उनके भाई-बहन के रथों का पूरा विवरण:
भगवान जगन्नाथ का रथ: 'नंदिघोष'
भगवान जगन्नाथ जी के रथ का नाम नंदिघोष है। यह रथ तीनों में सबसे विशाल होता है। इसका रंग लाल और पीला होता है। इसकी ऊंचाई 45 फीट होती है और इसमें 16 पहिए होते हैं। इसके सारथी दारूक हैं और रक्षक गरुड़ हैं। रथ को शंखचूड़ नाम की रस्सी से खींचा जाता है। इस रथ में चार सफेद रंग के घोड़े जुते होते हैं, जिनके नाम शंख, बलाहक, श्वेत और हरिदाश्व हैं।
भगवान बलभद्र का रथ: 'तालध्वज'
भगवान बलभद्र जी के रथ को तालध्वज कहा जाता है, जो अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है। इसका रंग लाल और हरा होता है। इसकी ऊंचाई 44 फीट होती है और इसमें 14 पहिए होते हैं। इसके सारथी मताली हैं और रक्षक वासुदेव हैं। रथ को बासुकी नाम की रस्सी से खींचा जाता है। इस रथ में चार काले रंग के घोड़े जुते होते हैं, जिनके नाम तीव्र, घोर, दीर्घाश्रम और स्वर्णनाभ हैं।
भगवती सुभद्रा का रथ: 'दर्पदलन'
माता सुभद्रा जी के रथ को दर्पदलन (या देवदलन) के नाम से जाना जाता है। इसका रंग लाल और काला होता है। इसकी ऊंचाई 42.5 फीट होती है और इसमें 12 पहिए होते हैं। इसके सारथी अर्जुन हैं और रक्षिका जयदुर्गा हैं। रथ को स्वर्णचुड़ा नाम की रस्सी से खींचा जाता है। इस रथ में चार लाल रंग के घोड़े जुते होते हैं, जिनके नाम रोचिक, मोचिक, जिता और अपराजिता हैं।
श्रद्धालुओं द्वारा खींचा जाता है रथ
रथयात्रा के दौरान इन तीनों पवित्र रथों को लाखों श्रद्धालुओं द्वारा खींचकर गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है। माना जाता है, कि इन रथों के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं।
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