27 साल बाद रक्षाबंधन पर बनेंगे 11 शुभ योग, भद्रा का नहीं रहेगा व्यवधान
नई दिल्ली (भारत)। इस बार रक्षाबंधन का पर्व कई शुभ संयोगों के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, करीब 27 साल बाद रक्षाबंधन के दिन एक साथ 11 महायोग बनने की बात कही जा रही है। इसके अलावा भद्रा का प्रभाव भी रक्षाबंधन के दिन नहीं रहेगा। ऐसे में बहनें पूरे दिन शुभ समय में भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकेंगी।
उदया तिथि के आधार पर 28 को होगा रक्षाबंधन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त को सुबह 8:31 बजे से शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के कारण रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि भद्रा 27 अगस्त की रात करीब 8:54 बजे समाप्त हो जाएगी, इसलिए 28 अगस्त को राखी बांधने के दौरान भद्रा का व्यवधान नहीं रहेगा।
11 शुभ योगों का बनेगा संयोग
इस रक्षाबंधन पर कई शुभ योग बनने की ज्योतिषीय मान्यता है। शतभिषा नक्षत्र के साथ अतिगंड, शोभन, श्रीवत्स, सौम्य और विजय जैसे योगों का उल्लेख किया गया है। ग्रहों की स्थिति के आधार पर चंद्राधि, बुधादित्य, विमल विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी, शकट और सुनफा योग बनने की भी बात कही जा रही है। ज्योतिष के अनुसार, ऐसे शुभ संयोगों में पूजा-पाठ, दान और रक्षासूत्र बांधने जैसे धार्मिक कार्यों को विशेष फलदायी माना जाता है।
सूर्य सिंह और गुरु कर्क राशि में रहेंगे
रक्षाबंधन के दिन ग्रहों की स्थिति भी विशेष बताई जा रही है। सूर्य सिंह राशि में रहेंगे, जिसे उनकी स्वराशि माना जाता है। वहीं गुरु कर्क राशि में स्थित होंगे, जो उनकी उच्च राशि है। ज्योतिषीय मान्यताओं में सूर्य को आत्मबल, प्रतिष्ठा और ऊर्जा का कारक तथा गुरु को ज्ञान, शिक्षा, बुद्धि और समृद्धि से जुड़ा ग्रह माना जाता है। चंद्रमा के कुंभ राशि में रहेंगे। ग्रहों की इस स्थिति को रक्षाबंधन के लिए शुभ संयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
राखी बांधते समय बोलें रक्षा मंत्र
परंपरा के अनुसार, भाई की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधते समय इस मंत्र का जाप किया जाता है—
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
माता पार्वती ने शुरू किया था रक्षाबंधन
मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने रक्षाबंधन के इस पर्व की शुरुआत की थी। उन्होंने सबसे पहले भगवान विष्णु को रक्षासूत्र बाँधा था। इसके बाद माता लक्ष्मी ने भगवान ब्रम्हा और माता सरस्वती ने भगवान शिव को रक्षासूत्र बाँधा था।
महाभारत से भी जुड़ी हैं राखी की कथाएं
रक्षाबंधन को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। महाभारत से जुड़ी लोकमान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की कलाई पर वस्त्र बांधा था और कृष्ण ने उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
राजा बलि की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दानी राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी, जो राजा बलि ने भगवान को पहचानते हुए दे दी थी। जिससे खुश होकर भगवान ने उन्हे पाताल लोक का स्वामी बना दिया एवं स्वयं उनके द्वारपाल (पहरेदार) बन गए। भगवान विष्णु के वैकुण्ठ न लौटने से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। माता लक्ष्मी एक गरीब ब्राह्मणी का रूप धारण कर पाताल लोक गईं। उन्होंने राजा बलि को श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन रक्षासूत्र बांधा। जब राजा बलि ने उपहार मांगने को कहा, तो माता लक्ष्मी ने अपने असली रूप में आकर भगवान विष्णु को मांग लिया। राजा बलि ने अपने वचन और स्नेह का मान रखते हुए भगवान विष्णु को मुक्त कर दिया।
पूरे दिन उत्सव का माहौल
भद्रा का प्रभाव रक्षाबंधन वाले दिन नहीं होने से इस बार पर्व को लेकर लोगों में खास उत्साह देखने को मिल सकता है। बहनें पूजा की थाली सजाकर भाई को तिलक करेंगी, आरती उतारेंगी और रक्षा सूत्र बांधेंगी। इसके बाद मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी जाएंगी। कई परिवारों में इस अवसर पर दान-पुण्य और पूजा-पाठ करने की भी परंपरा है।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)
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