4 सितंबर 2026 शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: भाद्रपद
ऋतु: वर्षा ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: अष्टमी — रात 12:13 बजे तक, इसके बाद नवमी
नक्षत्र: रोहिणी — रात 11:04 बजे तक, इसके बाद मृगशिरा
योग: हर्षण — दोपहर 3:44 बजे तक
करण: बालव — दोपहर 1:20 बजे तक, इसके बाद कौलव
वार: शुक्रवार
चंद्र राशि: वृषभ
सूर्य राशि: सिंह
ऋतु: वर्षा
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह 6:00 बजे (लगभग)
सूर्यास्त: शाम 6:39 बजे (लगभग)
चंद्रोदय: रात 11:29 बजे (लगभग)
चंद्रास्त: दोपहर 1:05 बजे (लगभग)
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
चर सामान्य प्रातः 06:00 से 07:35 बजे तक लाभ उन्नति रात्रि 07:35 से 09:10 बजे तक अमृत सर्वोत्तम रात्रि 09:10 से 10:45 बजे तक काल हानि सायं 10:45 से 12:20 बजे तक शुभ उत्तम रात्रि 12:20 से 01:55 बजे तक रोग अमंगल प्रातः 01:55 से 03:30 बजे तक उद्वेग अशुभ रात्रि 03:30 से 05:05 बजे तक चर सामान्य प्रातः 05:05 से 06:39 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
रोग अमंगल सायं 06:39 से 08:05 बजे तक काल हानि सायं 08:05 से 09:30 बजे तक लाभ उन्नति रात्रि 09:30 से 10:55 बजे तक उद्वेग अशुभ रात्रि 10:55 से 12:20 बजे तक शुभ उत्तम रात्रि 12:20 से 01:45 बजे तक अमृत सर्वोत्तम रात्रि 01:45 से 03:11 बजे तक चर सामान्य प्रातः 03:11 से 04:36 बजे तक रोग अमंगल प्रातः 04:36 से 06:00 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त: सुबह 4:25 बजे से 5:13 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम 6:29 बजे से 6:53 बजे तक।
राहुकाल: सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
यमगंड: दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:05 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 7:35 बजे से 9:10 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 8:32–9:23 बजे तथा दोपहर 12:45–1:36 बजे
अमृत काल: रात 8:03–9:33 बजे
वर्ज्य: दोपहर 3:32–5:02 बजे
दिशा शूल: पश्चिम दिशा। यदि यात्रा आवश्यक हो तो धार्मिक मान्यतानुसार जौ का सेवन करके यात्रा प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य सिंह चंद्रमा वृषभ मंगल मिथुन बुध सिंह गुरु कर्क शुक्र कन्या शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- श्रीयोगमाया जयंती
जन्माष्टमी पर क्या करें?
जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण और बाल गोपाल की पूजा करते हैं। घर के मंदिर को सजाकर भगवान को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। पंचामृत से अभिषेक, माखन-मिश्री, फल, मिठाई और दूध से बने व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाकर आरती और भजन-कीर्तन किया जाता है। कई भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और पूजा के बाद व्रत से संबंधित अपनी परंपरा के अनुसार पारण करते हैं।
जन्माष्टमी पर ध्यान रखें
व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करें। फलाहार या अन्य व्रत संबंधी आहार लेते समय अपनी पारिवारिक एवं धार्मिक परंपरा का पालन करें।
Disclaimer: (Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।)
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