8 नवंबर 2026 दीपावली, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन और काली पूजा का विशेष संयोग
नई दिल्ली (भारत)। आज नरक चतुर्दशी और अमावस्या के इस संयोग में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। देश के कई हिस्सों में इस दिन नरक चतुर्दशी, दीपावली, काली पूजा, दीपमालिका और शारदा पूजा भी मनाई जाएगी। दीपावली पर घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाए जाते हैं। शाम को प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और स्वच्छ, प्रकाशमय तथा भक्तिभाव से सजे घरों में उनका स्वागत किया जाता है।
पंचांग विवरण
विक्रम संवत: 2083
मास: कार्तिक
ऋतु: हेमंत
अयन: दक्षिणायन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: चतुर्दशी सुबह लगभग 11:27 बजे तक, इसके बाद अमावस्या
नक्षत्र: चित्रा के बाद स्वाति; स्वाति नक्षत्र दिन के शेष समय और पूरी रात रहेगा
योग: आयुष्मान, 9 नवंबर की सुबह लगभग 3:03 बजे तक; इसके बाद सौभाग्य
करण: शकुनि सुबह लगभग 11:27 बजे तक, इसके बाद चतुष्पद
वार: रविवार
चंद्र राशि: तुला
सूर्य राशि: तुला
सूर्योदय: सुबह 6:38 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:31 बजे
चंद्रोदय: अमावस्या के कारण नहीं होगा
चंद्रास्त: शाम लगभग 4:35 बजे
दिन के चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
उद्वेग — अशुभ — सुबह 6:38 से 7:59 बजे तक चर — सामान्य — सुबह 7:59 से 9:21 बजे तक लाभ — उन्नति — सुबह 9:21 से 10:43 बजे तक अमृत — सर्वोत्तम — सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक काल — सामान्य — दोपहर 12:04 से 1:26 बजे तक शुभ — उत्तम — दोपहर 1:26 से 2:48 बजे तक रोग — अमंगल — दोपहर 2:48 से 4:09 बजे तक उद्वेग — हानि — शाम 4:09 से 5:31 बजे तक
रात के चौघड़िया
प्रकृति — फल — समय अवधि
शुभ — उत्तम — शाम 5:31 से 7:09 बजे तक अमृत — सर्वोत्तम — शाम 7:09 से 8:48 बजे तक चर — सामान्य — रात 8:48 से 10:26 बजे तक रोग — अमंगल — रात 10:26 बजे से 12:04 बजे तक काल — हानि — रात 12:04 से 1:43 बजे तक लाभ — अमंगल — रात 1:43 से 3:21 बजे तक उद्वेग — अशुभ — रात 3:21 से 4:59 बजे तक शुभ — उन्नति — सुबह 4:59 से 6:38 बजे तक
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:53 से 5:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 1:54 से 2:37 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:07 से 5:55 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 5:31 से रात 8:08 बजे तक
निशिता काल: रात 11:38 से 9 नवंबर की रात 12:31 बजे तक
लक्ष्मी पूजा का प्रमुख समय: शाम 5:54 से 7:50 बजे तक
काली पूजा का समय: मध्य रात्रि
राहुकाल: शाम 4:09 से 5:31 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 12:04 से 1:26 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 2:48 से 4:09 बजे तक
दिशा शूल: पश्चिम दिशा। रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा से बचने की पारंपरिक मान्यता है। आवश्यक यात्रा होने पर गुड़ खाकर निकलने का उपाय बताया जाता है।
ग्रह गोचर
ग्रह — राशि — नक्षत्र
सूर्य — तुला — विशाखा चंद्रमा — तुला — चित्रा से स्वाति मंगल — कर्क — अश्लेषा बुध — तुला — स्वाति गुरु — सिंह — मघा शुक्र — कन्या — चित्रा शनि — मीन — उत्तराभाद्रपद राहु — कुंभ — धनिष्ठा केतु — सिंह — मघा
आज के प्रमुख व्रत और त्योहार
दीपावली और लक्ष्मी पूजन
कार्तिक अमावस्या को दीपावली का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके और रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए थे। तभी से दीपावली पर दीप जलाने की परंपरा प्रचलित हुई।
इस दिन शाम को घरों और प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के आरंभ का देवता कहा जाता है। पूजा में रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, मिठाई और फल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद परिवार के सदस्य आरती करते हैं और घर के मुख्य द्वार, आंगन तथा पूजा स्थल पर दीप जलाते हैं।
नरक चतुर्दशी
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी असुर का वध करके उसके बंदीगृह में कैद हजारों स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने की परंपरा है। कई क्षेत्रों में शरीर पर तेल लगाकर स्नान किया जाता है और घर के बाहर दीप जलाए जाते हैं। मान्यता है कि इससे पाप और नकारात्मकता का नाश होता है।
काली पूजा
पश्चिम बंगाल, मिथिला, असम, ओडिशा और पूर्वी भारत के कई क्षेत्रों में दीपावली की रात मां काली की पूजा की जाती है। मां काली को शक्ति, साहस और दुष्ट शक्तियों के विनाश की देवी माना जाता है। इस दिन मंदिरों और पूजा पंडालों में मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। रात में विशेष पूजा, मंत्र जाप और आरती की जाती है। भक्त मां काली से भय, संकट और नकारात्मकता से रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
दीपमालिका और दीपदान
दीपावली पर घर के हर कोने में दीपक जलाने की परंपरा है। मिट्टी के दीपक में तेल या घी डालकर उन्हें घर के द्वार, खिड़की, आंगन, तुलसी चौरा और पूजा स्थल पर रखा जाता है। दीपदान को शुभता, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
शारदा पूजा और चोपड़ा पूजन
व्यापारी वर्ग में दीपावली के दिन बही-खातों और नए लेखा-वर्ष की पूजा करने की परंपरा है। इसे चोपड़ा पूजन कहा जाता है। इस अवसर पर व्यापारी अपने नए बही-खातों, लेखा पुस्तकों और व्यापारिक दस्तावेजों की पूजा करते हैं। विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की आराधना की जाती है। इसे शारदा पूजा कहा जाता है। विद्यार्थी और कलाकार मां सरस्वती से ज्ञान, कला और विवेक की कामना करते हैं।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
- शाम को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें।
- घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीप जलाएं।
- धन और समृद्धि के लिए भगवान कुबेर का स्मरण करें।
- मां काली की पूजा करने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रात्रि पूजा करें।
- जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और मिठाई का दान करें।
- परिवार के साथ मिलकर दीपावली मनाएं और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित तरीके से दीप एवं आतिशबाजी का उपयोग करें।
Disclaimer: PrimeNews इस लेख में दी गई पंचांग संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह उपलब्ध पंचांग गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत और पूजा का समय अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से अवश्य जांचें।