श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। आज की तिथि एवं विशेष जानकारी
मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
पक्ष व तिथि: श्रावण कृष्ण पक्ष चतुर्दशी (12 अगस्त की रात्रि 01:52 बजे तक), इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ।
माह: श्रावण
ऋतु: वर्षा ऋतु
अयन: दक्षिणायन
वार: मंगलवार
नक्षत्र: पुनर्वसु (प्रातः 10:09 बजे तक), इसके बाद पुष्य।
योग: सिद्धि योग (सायं 06:51 बजे तक), इसके बाद व्यतीपात योग।
करण: विष्टि (दोपहर 03:22 बजे तक), इसके बाद शकुनि, जो 12 अगस्त की रात्रि 01:52 बजे तक रहेगा।
चंद्र राशि: मिथुन (प्रातः लगभग 10:09 बजे तक), इसके बाद कर्क
सूर्य राशि: कर्क
सूर्योदय: प्रातः लगभग 05:50 बजे
सूर्यास्त: सायं लगभग 07:08 बजे
चंद्रोदय: प्रातः लगभग 05:18 बजे
चंद्रास्त: सायं लगभग 06:21 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
रोग अमंगल प्रातः 05:50 से 07:28 तक उद्वेग अशुभ प्रातः 07:28 से 09:06 तक चर सामान्य प्रातः 09:06 से 10:44 तक लाभ उन्नति प्रातः 10:44 से 12:22 तक अमृत सर्वोत्तम दोपहर 12:22 से 02:00 तक काल हानि दोपहर 02:00 से 03:38 तक शुभ उत्तम सायं 03:38 से 05:26 तक रोग अमंगल सायं 05:26 से 07:08 तक
रात्रि का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
काल हानि सायं 07:08 से 08:30 तक लाभ उन्नति रात्रि 08:30 से 09:52 तक उद्वेग अशुभ रात्रि 09:52 से 11:14 तक शुभ उत्तम रात्रि 11:14 से 12:36 तक अमृत सर्वोत्तम रात्रि 12:36 से 01:58 तक चर सामान्य रात्रि 01:58 से 03:20 तक रोग अमंगल रात्रि 03:20 से 04:42 तक काल हानि प्रातः 04:42 से 05:50 तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त: दोपहर लगभग 12:00 बजे से 12:53 बजे तक।
राहुकाल: दोपहर लगभग 03:38 बजे से 05:26 बजे तक।
यमगण्ड: प्रातः लगभग 09:06 बजे से 10:44 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर लगभग 12:22 बजे से 02:00 बजे तक।
दिशाशूल: उत्तर दिशा। यदि यात्रा आवश्यक हो तो धार्मिक मान्यतानुसार गुड़ का सेवन करके प्रस्थान करना शुभ माना जाता है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कर्क चंद्रमा मिथुन (लगभग 10:09 बजे तक), इसके बाद कर्क मंगल वृषभ बुध मिथुन गुरु (बृहस्पति) कर्क शुक्र सिंह शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
सावन शिवरात्रि: श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सावन शिवरात्रि मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र अर्पण और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की धार्मिक मान्यता है।
मासिक शिवरात्रि: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के साथ इसका विशेष संयोग बन रहा है।
दूसरा मंगला गौरी व्रत: मंगलवार होने के कारण श्रावण मास का दूसरा मंगला गौरी व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से माता गौरी की पूजा और दांपत्य सुख की कामना से जुड़ा माना जाता है।
शिव पूजा का विशेष समय: सावन शिवरात्रि में रात्रि के समय भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त रात्रि में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव का पूजन करते हैं।
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। पंचांग के समय स्थान के अनुसार अलग हो सकते हैं।)
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