30 सितंबर 2026 बुधवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और भरणी नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: चतुर्थी — दोपहर 2:55 बजे तक, इसके बाद पंचमी
नक्षत्र: भरणी — सुबह 7:36 बजे तक, इसके बाद कृत्तिका
योग: वज्र — रात करीब 12:20 बजे तक, इसके बाद सिद्धि
करण: बालव — दोपहर 2:55 बजे तक, इसके बाद कौलव
वार: बुधवार
चंद्र राशि: मेष
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह 6:13 बजे लगभग
सूर्यास्त: शाम 6:08 बजे लगभग
चंद्रोदय: रात 8:33 बजे लगभग
चंद्रास्त: सुबह 9:49 बजे लगभग
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
लाभ उन्नति प्रातः 06:13 से 07:42 बजे तक अमृत सर्वोत्तम प्रातः 07:42 से 09:11 बजे तक काल हानि प्रातः 09:11 से 10:41 बजे तक शुभ उत्तम प्रातः 10:41 से दोपहर 12:10 बजे तक रोग अमंगल दोपहर 12:10 से 01:40 बजे तक उद्वेग अशुभ दोपहर 01:40 से 03:09 बजे तक चर सामान्य दोपहर 03:09 से 04:39 बजे तक लाभ उन्नति शाम 04:39 से 06:08 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
उद्वेग अशुभ शाम 06:08 से 07:38 बजे तक शुभ उत्तम शाम 07:38 से 09:08 बजे तक अमृत सर्वोत्तम रात 09:08 से 10:38 बजे तक चर सामान्य रात 10:38 से 12:08 बजे तक रोग अमंगल प्रातः 12:08 से 01:38 बजे तक काल हानि प्रातः 01:38 से 03:08 बजे तक लाभ उन्नति प्रातः 03:08 से 04:38 बजे तक उद्वेग अशुभ प्रातः 04:38 से 06:13 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त: सुबह करीब 4:37 से 5:25 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:11 से 2:59 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 6:08 से 6:32 बजे तक
राहुकाल: दोपहर करीब 12:10 से 1:40 बजे तक
यमगंड: सुबह करीब 7:42 से 9:11 बजे तक
गुलिक काल: सुबह करीब 10:41 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह करीब 11:47 बजे से 12:35 बजे तक
दिशा शूल: उत्तर दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा आवश्यक होने पर अपनी परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या चंद्रमा मेष मंगल मिथुन बुध कन्या गुरु कर्क शुक्र तुला शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
चतुर्थी श्राद्ध: पितृ पक्ष के दौरान आज चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।
आज क्या करें?
- पितरों का स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। - चतुर्थी श्राद्ध अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार करें। - जरूरतमंदों को अन्न, भोजन या वस्त्र का दान करें। - बुधवार होने के कारण भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं। - गणेश जी को दूर्वा और मोदक या लड्डू अर्पित करें। - ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। - पितृ पक्ष के दौरान सात्विक आहार और संयमित दिनचर्या का पालन करें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।