14 अक्टूबर 2026 बुधवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और अनुराधा नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: चतुर्थी — 15 अक्टूबर की रात करीब 1:13 बजे तक, इसके बाद पंचमी
नक्षत्र: अनुराधा — 15 अक्टूबर की सुबह करीब 4:03 बजे तक, इसके बाद ज्येष्ठा
योग: आयुष्मान — रात करीब 8:38 बजे तक, इसके बाद सौभाग्य
करण: वणिज — दोपहर करीब 12:17 बजे तक; इसके बाद विष्टि — 15 अक्टूबर की रात करीब 1:13 बजे तक
वार: बुधवार
चंद्र राशि: वृश्चिक
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:21 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:52 बजे
चंद्रोदय: सुबह करीब 9:43–9:47 बजे
चंद्रास्त: रात करीब 8:00 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
अमृत सर्वोत्तम सुबह 6:21 से 7:47 बजे तक काल हानि सुबह 7:47 से 9:14 बजे तक शुभ उत्तम सुबह 9:14 से 10:40 बजे तक रोग अमंगल सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक उद्वेग अशुभ दोपहर 12:07 से 1:33 बजे तक चर सामान्य दोपहर 1:33 से 2:59 बजे तक लाभ उन्नति दोपहर 2:59 से 4:26 बजे तक अमृत सर्वोत्तम शाम 4:26 से 5:52 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
उद्वेग अशुभ शाम 5:52 से 7:26 बजे तक शुभ उत्तम रात 7:26 से 9:00 बजे तक अमृत सर्वोत्तम रात 9:00 से 10:33 बजे तक चर सामान्य रात 10:33 से 12:07 बजे तक रोग अमंगल रात 12:07 से 1:40 बजे तक काल हानि रात 1:40 से 3:14 बजे तक लाभ उन्नति रात 3:14 से 4:48 बजे तक उद्वेग अशुभ सुबह 4:48 से 6:21 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:41 से 5:31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:43 से दोपहर 12:30 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:07 से 2:49 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:28 से 6:16 बजे तक
राहुकाल: दोपहर करीब 12:07 से 1:33 बजे तक
यमगंड: सुबह करीब 7:47 से 9:14 बजे तक
गुलिक काल: सुबह करीब 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
दिशा शूल: उत्तर दिशा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या चंद्रमा वृश्चिक मंगल कर्क बुध तुला गुरु कर्क शुक्र तुला शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
मां कूष्मांडा की पूजा: मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी के रूप में भी जाना जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा जैसे आयुधों का वर्णन मिलता है। उनका वाहन सिंह है। भक्त इस दिन देवी को पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करते हैं।
मां कूष्मांडा का मंत्र:
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥
धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना से भक्तों को ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता की प्रेरणा मिलती है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां दुर्गा और मां कूष्मांडा की पूजा करें।
- मां कूष्मांडा को पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मालपुआ या अन्य सात्विक मिठाई का भोग लगा सकते हैं।
- मां कूष्मांडा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- मां दुर्गा की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक या लड्डू अर्पित कर सकते हैं।
- व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियमों का पालन करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें और दिनभर संयमित वाणी तथा सकारात्मक व्यवहार बनाए रखें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी उपलब्ध पंचांग स्रोतों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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