7 अक्टूबर 2026 बुधवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और मघा नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: द्वादशी — रात करीब 11:16 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी
नक्षत्र: मघा — रात करीब 9:40 बजे तक, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी
योग: शुभ — अगले दिन सुबह तक
करण: कौलव — दोपहर करीब 11:53 बजे तक, इसके बाद तैतिल — रात करीब 11:16 बजे तक
वार: बुधवार
चंद्र राशि: सिंह
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह 6:17 बजे लगभग
सूर्यास्त: शाम 6:00 बजे लगभग
चंद्रोदय: रात करीब 2:54 बजे
चंद्रास्त: दोपहर करीब 3:57 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
लाभ उन्नति प्रातः 06:17 से 07:45 बजे तक उद्वेग अशुभ प्रातः 07:45 से 09:13 बजे तक शुभ उत्तम प्रातः 09:13 से 10:41 बजे तक चर सामान्य प्रातः 10:41 से दोपहर 12:09 बजे तक रोग अमंगल दोपहर 12:09 से 01:37 बजे तक काल हानि दोपहर 01:37 से 03:05 बजे तक लाभ उन्नति दोपहर 03:05 से 04:33 बजे तक उद्वेग अशुभ शाम 04:33 से 06:00 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
शुभ उत्तम शाम 06:00 से 07:32 बजे तक अमृत सर्वोत्तम रात 07:32 से 09:04 बजे तक चर सामान्य रात 09:04 से 10:36 बजे तक रोग अमंगल रात 10:36 से 12:08 बजे तक काल हानि रात 12:08 से 01:40 बजे तक लाभ उन्नति रात 01:40 से 03:12 बजे तक उद्वेग अशुभ रात 03:12 से 04:44 बजे तक शुभ उत्तम प्रातः 04:44 से 06:17 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त: सुबह करीब 4:40 से 5:29 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:06 से 2:53 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 6:00 से 6:25 बजे तक
अमृत काल: रात करीब 6:58 से 8:29 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 12:09 से 1:37 बजे तक
यमगंड: सुबह 7:45 से 9:13 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 10:41 से दोपहर 12:09 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह करीब 11:45 से 12:32 बजे तक
दिशा शूल: उत्तर दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा आवश्यक होने पर अपनी परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या चंद्रमा सिंह मंगल मिथुन बुध कन्या गुरु कर्क शुक्र तुला शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
द्वादशी श्राद्धः पितृ पक्ष के दौरान आज द्वादशी श्राद्ध किया जाएगा। जिन पितरों की मृत्यु तिथि द्वादशी हो, उनके लिए आज श्राद्ध, तर्पण आदि कर्म करने की परंपरा है। श्राद्ध कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा और योग्य पुरोहित के मार्गदर्शन में करना उचित माना जाता है।
आज क्या करें?
पितरों का स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। द्वादशी श्राद्ध अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार करें। इंदिरा एकादशी व्रत रखने वालों को उचित समय पर पारण करना चाहिए। जरूरतमंदों को अन्न, भोजन, फल, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें। भगवान विष्णु का स्मरण और पूजा करें। पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या का पालन करें। श्राद्ध कर्म में अपने कुलाचार और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।