10 अगस्त 2026 (सोमवार) को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि और आर्द्रा नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। आज की तिथि एवं विशेष जानकारी
मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: श्रावण
पक्ष: कृष्ण पक्ष
वार: सोमवार
तिथि: द्वादशी प्रातः 08:01 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी 11 अगस्त को प्रातः 04:54 बजे तक।
नक्षत्र: आर्द्रा दोपहर 12:26 बजे तक, इसके बाद पुनर्वसु 11 अगस्त को प्रातः 10:09 बजे तक।
योग: वज्र योग रात्रि 10:26 बजे तक, इसके बाद सिद्धि योग प्रारंभ।
करण: तैतिल प्रातः 08:01 बजे तक, इसके बाद गर करण सायं 06:27 बजे तक, फिर वणिज करण 11 अगस्त को प्रातः 04:54 बजे तक।
चंद्र राशि: मिथुन
सूर्य राशि: कर्क
सूर्योदय: प्रातः 05:47 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:05 बजे
चंद्रोदय: प्रातः 02:40 बजे
चंद्रास्त: सायं 05:22 बजे
दिन का चौघड़िया
10 अगस्त को दिल्ली (NCR) में सूर्योदय लगभग 05:47 बजे और सूर्यास्त 07:05 बजे है।
प्रकृति फल समय अवधि
अमृत सर्वोत्तम प्रातः 05:47 से 07:27 तक काल हानि प्रातः 07:27 से 09:07 तक शुभ उत्तम प्रातः 09:07 से 10:46 तक रोग अमंगल प्रातः 10:46 से 12:26 तक उद्वेग अशुभ दोपहर 12:26 से 02:06 तक चर सामान्य दोपहर 02:06 से 03:46 तक लाभ उन्नति सायं 03:46 से 05:25 तक अमृत सर्वोत्तम सायं 05:25 से 07:05 तक
रात्रि का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
चर सामान्य सायं 07:05 से 08:45 तक रोग अमंगल रात्रि 08:45 से 10:25 तक काल हानि रात्रि 10:25 से 12:05 तक लाभ उन्नति रात्रि 12:05 से 01:45 तक उद्वेग अशुभ रात्रि 01:45 से 03:25 तक शुभ उत्तम प्रातः 03:25 से 05:05 तक अमृत सर्वोत्तम प्रातः 05:05 से 06:45 तक चर सामान्य सूर्योदय तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11:59 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक।
राहुकाल: प्रातः 07:27 बजे से 09:07 बजे तक।
यमगण्ड: प्रातः 10:46 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक।
गुलिक काल: दोपहर 02:06 बजे से 03:46 बजे तक।
दिशाशूल: पूर्व दिशा। सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा से बचना शुभ माना जाता है। यात्रा आवश्यक हो, तो दर्पण देखकर भगवान शिव का स्मरण करके प्रस्थान करें।
आज का धार्मिक महत्व
10 अगस्त को सावन का सोमवार होने के कारण भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर "ॐ नमः शिवाय" का जाप करना श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है। इस दिन शाम को त्रयोदशी तिथि शुरू होने के कारण सोम प्रदोष व्रत का भी विशेष धार्मिक महत्व बनता है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कर्क चंद्रमा मिथुन मंगल वृषभ बुध कर्क गुरु (बृहस्पति) कर्क शुक्र सिंह शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग गणनाओं पर आधारित है। पंचांग के समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी शुभ कार्य या व्रत-पूजन से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।)
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