15 अक्टूबर 2026 गुरुवार को आश्विन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और ज्येष्ठा नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: पंचमी — 16 अक्टूबर की सुबह करीब 3:25 बजे तक, इसके बाद षष्ठी
नक्षत्र: ज्येष्ठा — 16 अक्टूबर की सुबह करीब 6:47 बजे तक, इसके बाद मूल
योग: सौभाग्य — रात करीब 9:14 बजे तक, इसके बाद शोभन
करण: बव — दोपहर करीब 2:17 बजे तक; इसके बाद बालव — 16 अक्टूबर की सुबह करीब 3:25 बजे तक
वार: गुरुवार
चंद्र राशि: वृश्चिक — सुबह करीब 6:47 बजे तक, इसके बाद धनु
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह करीब 6:21 बजे
सूर्यास्त: शाम करीब 5:51 बजे
चंद्रोदय: सुबह करीब 10:40–10:46 बजे
चंद्रास्त: रात करीब 8:44–8:50 बजे
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
शुभ उत्तम सुबह 6:21 से 7:47 बजे तक रोग अमंगल सुबह 7:47 से 9:14 बजे तक उद्वेग अशुभ सुबह 9:14 से 10:40 बजे तक चर सामान्य सुबह 10:40 से दोपहर 12:07 बजे तक लाभ उन्नति दोपहर 12:07 से 1:33 बजे तक अमृत सर्वोत्तम दोपहर 1:33 से 3:00 बजे तक काल हानि दोपहर 3:00 से 4:26 बजे तक शुभ उत्तम शाम 4:26 से 5:51 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
अमृत सर्वोत्तम शाम 5:51 से 7:25 बजे तक चर सामान्य रात 7:25 से 8:59 बजे तक रोग अमंगल रात 8:59 से 10:32 बजे तक काल हानि रात 10:32 से 12:06 बजे तक लाभ उन्नति रात 12:06 से 1:39 बजे तक उद्वेग अशुभ रात 1:39 से 3:13 बजे तक शुभ उत्तम रात 3:13 से 4:47 बजे तक अमृत सर्वोत्तम सुबह 4:47 से 6:21 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह करीब 4:41 से 5:31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह करीब 11:43 से दोपहर 12:29 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:02 से 2:48 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:51 से 6:16 बजे तक
राहुकाल: दोपहर करीब 1:33 से 2:59 बजे तक
यमगंड: सुबह करीब 6:21 से 7:48 बजे तक
गुलिक काल: सुबह करीब 9:14 से 10:40 बजे तक
दिशा शूल: दक्षिण दिशा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या चंद्रमा वृश्चिक से धनु मंगल कर्क बुध तुला गुरु कर्क शुक्र तुला शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन: 15 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता हैं। उनकी गोद में बालरूप स्कंद विराजमान रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी पूजा से भक्तों को ममता, शांति, साहस और परिवार के कल्याण की प्रेरणा मिलती है।
मां स्कंदमाता की पूजा: मां स्कंदमाता को कमल पर विराजमान देवी के रूप में दर्शाया जाता है। इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका वाहन सिंह है। भक्त इस दिन देवी को पुष्प, अक्षत, चंदन, फल और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करते हैं।
मां स्कंदमाता का मंत्र:
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
मान्यता है कि मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मकता और परिवार के प्रति प्रेम की प्रेरणा मिलती है।
आज क्या करें?
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां स्कंदमाता की पूजा करें।
- मां स्कंदमाता को पुष्प, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- अपनी परंपरा के अनुसार केले या अन्य फल का भोग लगा सकते हैं।
- मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
- मां दुर्गा की आरती कर परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
- गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु मंत्र का जाप कर सकते हैं।
- व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत के नियमों का पालन करें।
- जरूरतमंदों की सहायता करें और दिनभर संयमित वाणी तथा सकारात्मक व्यवहार बनाए रखें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी उपलब्ध पंचांग स्रोतों और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया और मुहूर्त में स्थान तथा गणना-पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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