8 अक्टूबर 2026 गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083
मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: त्रयोदशी — रात 10:15 बजे तक, इसके बाद चतुर्दशी
नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी — रात 9:20 बजे तक, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी
योग: शुक्ल — 9 अक्टूबर की रात करीब 12:58 बजे तक, इसके बाद ब्रह्म
करण: गर — सुबह 10:43 बजे तक, इसके बाद वणिज — रात 10:15 बजे तक
वार: गुरुवार
चंद्र राशि: सिंह
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह 6:18 बजे लगभग
सूर्यास्त: शाम 5:59 बजे लगभग
चंद्रोदय: 9 अक्टूबर की सुबह करीब 4:54 बजे
चंद्रास्त: शाम 4:29 बजे लगभग
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
शुभ उत्तम प्रातः 06:18 से 07:46 बजे तक रोग अमंगल प्रातः 07:46 से 09:14 बजे तक उद्वेग अशुभ प्रातः 09:14 से 10:42 बजे तक चर सामान्य प्रातः 10:42 से दोपहर 12:10 बजे तक लाभ उन्नति दोपहर 12:10 से 01:38 बजे तक अमृत सर्वोत्तम दोपहर 01:38 से 03:06 बजे तक काल हानि दोपहर 03:06 से 04:34 बजे तक शुभ उत्तम शाम 04:34 से 05:59 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
अमृत सर्वोत्तम शाम 05:59 से 07:31 बजे तक चर सामान्य रात 07:31 से 09:03 बजे तक रोग अमंगल रात 09:03 से 10:35 बजे तक काल हानि रात 10:35 से 12:07 बजे तक लाभ उन्नति रात 12:07 से 01:39 बजे तक उद्वेग अशुभ रात 01:39 से 03:11 बजे तक शुभ उत्तम रात 03:11 से 04:43 बजे तक अमृत सर्वोत्तम प्रातः 04:43 से 06:18 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त: सुबह करीब 4:40 से 5:29 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:06 से 2:53 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 5:59 से 6:23 बजे तक
प्रदोष काल: शाम करीब 5:59 से रात 8:27 बजे तक
अमृत काल: दोपहर करीब 3:00 से 4:35 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 1:41 से 3:09 बजे तक
यमगंड: सुबह 6:18 से 7:46 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 9:14 से 10:42 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह करीब 10:13 से 11:00 बजे तक
दिशा शूल: दक्षिण दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा आवश्यक होने पर अपनी परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या चंद्रमा सिंह मंगल मिथुन बुध कन्या गुरु कर्क शुक्र तुला शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
त्रयोदशी श्राद्धः पितृ पक्ष के दौरान आज त्रयोदशी श्राद्ध किया जाएगा। जिन पितरों की मृत्यु तिथि त्रयोदशी हो, उनके लिए आज श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किए जा सकते हैं।
आज क्या करें?
- प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
- शिवलिंग पर जल अर्पित कर बेलपत्र चढ़ाएं।
- सामर्थ्य के अनुसार प्रदोष व्रत रखें।
- पितरों का स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
- त्रयोदशी श्राद्ध अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, भोजन, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
- भगवान शिव के मंत्र का जाप करें और संभव हो तो रात्रि में शिव आराधना करें।
- पितृ पक्ष के दौरान सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या का पालन करें।
- श्राद्ध कर्म में अपने कुलाचार और स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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