29 सितंबर 2026 मंगलवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि और अश्विनी नक्षत्र का संयोग
नई दिल्ली (भारत)। मुख्य तिथि एवं काल गणना
विक्रम संवत: 2083 मास: आश्विन
ऋतु: शरद ऋतु
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: तृतीया — शाम 5:09 बजे तक, इसके बाद चतुर्थी
नक्षत्र: अश्विनी — सुबह 9:03 बजे तक, इसके बाद भरणी
योग: हर्षण — अगले दिन तड़के करीब 3:20 बजे तक
करण: वणिज — सुबह 6:13 बजे तक, इसके बाद विष्टि — शाम 5:09 बजे तक, फिर बव
वार: मंगलवार
चंद्र राशि: मेष
सूर्य राशि: कन्या
अयन: दक्षिणायन
सूर्योदय: सुबह 6:13 बजे लगभग
सूर्यास्त: शाम 6:10 बजे लगभग
चंद्रोदय: शाम 7:44 बजे लगभग
चंद्रास्त: सुबह 8:40 बजे लगभग
दिन का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
रोग अमंगल प्रातः 06:13 से 07:42 बजे तक उद्वेग अशुभ प्रातः 07:42 से 09:12 बजे तक चर सामान्य प्रातः 09:12 से 10:42 बजे तक लाभ उन्नति प्रातः 10:42 से दोपहर 12:11 बजे तक अमृत सर्वोत्तम दोपहर 12:11 से 01:41 बजे तक काल हानि दोपहर 01:41 से 03:10 बजे तक शुभ उत्तम दोपहर 03:10 से 04:40 बजे तक रोग अमंगल शाम 04:40 से 06:10 बजे तक
रात का चौघड़िया
प्रकृति फल समय अवधि
काल हानि शाम 06:10 से 07:40 बजे तक लाभ उन्नति शाम 07:40 से 09:11 बजे तक उद्वेग अशुभ रात 09:11 से 10:41 बजे तक शुभ उत्तम रात 10:41 से 12:11 बजे तक अमृत सर्वोत्तम रात 12:11 से 01:42 बजे तक चर सामान्य रात 01:42 से 03:12 बजे तक रोग अमंगल रात 03:12 से 04:43 बजे तक काल हानि प्रातः 04:43 से 06:13 बजे तक
शुभ और अशुभ मुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त: सुबह करीब 4:37 से 5:25 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर करीब 2:11 से 2:58 बजे तक
गोधूलि बेला: शाम करीब 6:10 से 6:34 बजे तक
राहुकाल: दोपहर 3:10 से 4:40 बजे तक
यमगंड: सुबह 9:12 से 10:42 बजे तक
गुलिक काल: दोपहर 12:11 से 1:41 बजे तक
दुर्मुहूर्त: सुबह 8:36 से 9:24 बजे तथा रात 10:59 से 11:47 बजे तक
अमृत काल: रात करीब 3:06 से 4:36 बजे तक
वर्ज्य: शाम करीब 6:04 से 7:34 बजे तक
दिशा शूल: उत्तर दिशा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा आवश्यक होने पर अपनी परंपरा के अनुसार उपाय किए जा सकते हैं।
ग्रह गोचर स्थिति
ग्रह राशि
सूर्य कन्या चंद्रमा मेष मंगल मिथुन बुध कन्या गुरु कर्क शुक्र तुला शनि मीन राहु कुंभ केतु सिंह
आज के प्रमुख धार्मिक अवसर
तृतीया श्राद्ध: पितृ पक्ष के दौरान आज तृतीया तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध कर्म और दान-पुण्य अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।
आज क्या करें?
- पितरों का स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें।
- तृतीया श्राद्ध अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, भोजन या वस्त्र का दान करें।
- मंगलवार होने के कारण हनुमान जी की पूजा और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं।
- शाम के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होने पर भगवान गणेश का स्मरण करें।
- गणेश जी को दूर्वा, मोदक या लड्डू अर्पित कर सकते हैं।
- पितृ पक्ष के दौरान सात्विक आहार और धार्मिक अनुशासन का पालन करें।
Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध पंचांग स्रोतों पर आधारित है। तिथि, नक्षत्र, योग, करण एवं मुहूर्त में स्थान विशेष के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी शुभ कार्य, व्रत या पूजा से पहले अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग से सत्यापन अवश्य करें।
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