प्रत्येक वर्ष श्रवण मास के शुक्ल-पक्ष की तृतीया को

भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन से जुड़ा है यह पावन पर्व

This Sacred Festival Is Associated With the Divine Reunion of Lord Shiva and Goddess Parvati

नई दिल्ली (भारत)। सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। यह त्योहार विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं, व्रत रखती हैं और पति की लंबी आयु तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। हरियाली तीज प्रकृति की हरियाली, प्रेम, सौभाग्य और शिव-पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक भी मानी जाती है।

माता पार्वती ने की थी कठोर तपस्या

पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। मान्यता है कि माता पार्वती ने कई वर्षों तक अन्न और जल का त्याग करके भगवान शिव की आराधना की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

कहा जाता है कि माता पार्वती के तप और समर्पण की परीक्षा लेने के बाद भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की। इसी कारण हरियाली तीज को पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और वैवाहिक सुख से जोड़कर देखा जाता है।

विष्णु भगवान से विवाह की बात सुनकर किया तप

एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, माता पार्वती के पिता हिमवान उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। माता पार्वती भगवान शिव को ही अपना पति मान चुकी थीं। अपनी इच्छा पूरी करने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी।

माता पार्वती की सखी उन्हें एक वन में ले गईं, जहां उन्होंने भगवान शिव की प्राप्ति के लिए तप किया। उनकी इसी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए इस पर्व का नाम हरियाली तीज पड़ा और इसे माता पार्वती की अटूट श्रद्धा और तपस्या की याद में मनाया जाने लगा।

क्यों महत्वपूर्ण है हरियाली तीज?

हरियाली तीज सावन की हरियाली और प्रकृति के सौंदर्य से भी जुड़ी है। इस समय चारों ओर हरियाली छा जाती है और वातावरण सुहावना हो जाता है। महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलकर तीज के लोकगीत गाती हैं।

धार्मिक मान्यता है कि हरियाली तीज पर श्रद्धापूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। अविवाहित युवतियां भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत और पूजा करती हैं।

शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व

हरियाली तीज पर महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करती हैं और भगवान शिव को बेलपत्र, जल आदि चढ़ाकर पूजा करती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में तीज की कथा सुनती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं।

इस तरह हरियाली तीज केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, आस्था, प्रकृति और वैवाहिक समर्पण का उत्सव भी है। माता पार्वती की तपस्या की यह कथा महिलाओं को धैर्य, विश्वास और अपने संकल्प के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है।

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