विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा, मंत्र जाप और

विनायक चतुर्थी पर करें गणेश पूजा, जानें व्रत विधि और महत्व

Vinayak Chaturthi:

नई दिल्ली (भारत)। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत रखकर गणपति की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होने और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

क्यों खास है विनायक चतुर्थी?

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने की परंपरा है। वैनायकी चतुर्थी पर गणपति की आराधना करने से भक्त ज्ञान, बुद्धि, सफलता और कार्यों में आने वाली बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

विनायक चतुर्थी की पूजा विधि

इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की सफाई करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर, फल और मोदक या लड्डू अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद धूप और दीपक जलाकर भगवान गणेश का ध्यान करें। “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें और गणेश जी की आरती करें।

दूर्वा और मोदक क्यों चढ़ाए जाते हैं?

धार्मिक परंपरा में दूर्वा को भगवान गणेश का प्रिय माना जाता है। इसलिए गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। वहीं मोदक को गणपति का प्रिय भोग माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार मोदक, लड्डू या अन्य मिठाई का भोग लगा सकते हैं।

विनायक चतुर्थी का व्रत कैसे रखें?

व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह पूजा के बाद व्रत का संकल्प लेते हैं। कई लोग दिनभर फलाहार करते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं। शाम को गणेश जी की पूजा और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठोर उपवास करने से बचना चाहिए और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार भोजन लेना उचित है।

गणेश जी के मंत्र का करें जाप

विनायक चतुर्थी पर भगवान गणेश के इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है—

“ॐ गं गणपतये नमः।”

इसमें 'गं' अक्षर गणेश जी का मूल बीज मंत्र माना जाता है। आप केवल इस बीजमंत्र का भी जाप कर सकते हैं।

"वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।।"

गणेश गायत्री मंत्र

"ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात्॥"

इसके अलावा 'गणेश अथर्वशीर्ष' का पाठ भी किया जा सकता है।

पूजा के बाद करें दान

इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, फल, वस्त्र या भोजन दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से दान और सेवा को पुण्यकारी कार्य माना गया है।

विनायक चतुर्थी का संदेश

विनायक चतुर्थी भक्तों को भगवान गणेश की आराधना के साथ बुद्धि, विवेक, धैर्य और अच्छे कर्मों का महत्व याद दिलाती है। मान्यता है कि गणेश जी का आशीर्वाद लेकर शुरू किया गया शुभ कार्य सफलता की ओर बढ़ता है।

(Disclaimer: Prime News इस लेख की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है।)

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