हिंदू पंचांग का तीसरा और सभी महीनों में सबसे बड़ा

आखिर ज्येष्ठ महीना क्यों है इतना खास? आइए जानें इसके पीछे की वजह

Special Month of year 'Jyeshtha'

नई दिल्ली। सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाले हिंदू पंचांग का तीसरा महीना 'ज्येष्ठ' काफी खास महीना है। इस महीने को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा गया। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद, मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही।

धार्मिक दृष्टिकोण से ज्येष्ठ मास है बेहद अहम

धार्मिक दृष्टिकोण से ज्येष्ठ मास को जप, तप, और विशेष रूप से दान-पुण्य का महीना माना जाता है। इस महीने में अनेक व्रत एवं त्योहार मनाए जाते हैं। उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश में 'बड़ा मंगल' (बुढ़वा मंगल) का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है, कि इसी दिन हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। जिस कारण उन्हें यह दिन काफी प्रिय है।

जल एवं छाया दान का विशेष महत्व

इस महीने में जल एवं छाया दान का विशेष महत्व है। लोग जगह-जगह पर राहगीरों के लिए शीतल जल, शर्बत इत्यादि का दान करते हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस महीने में सूर्य देव अपनी पूरी ऊर्जा के साथ तपते हैं, जिसके कारण जल का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। शास्त्रों में इस दौरान प्यासे को पानी पिलाना और छायादार वस्तुओं (जैसे छाता, वृक्ष) का दान करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। सामाजिक संस्थाओं और आम लोगों द्वारा जगह-जगह पर निशुल्क प्याऊ लगाए जाते हैं।

इस महीने में आते हैं विभिन्न त्योहार

इस महीने में कई बड़े पौराणिक पर्व मनाए गए। वट सावित्री व्रत, गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी, गायत्री जयंती, शनि जयंती, ज्येष्ठ अमावस्या जैसे कई महत्वपूर्ण एवं अहम त्योहार लोगों ने पूरे हर्षोउल्लास के साथ मानाया। हरिद्वार, वाराणसी प्रयागराज इत्यादि शहरों में विभिन्न गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया। धार्मिक गुरुओं का कहना है, कि ज्येष्ठ का महीना हमें न केवल आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि प्रकृति और मानव सेवा के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी अहसास कराता है।

यह भी पढ़ेंः ऑस्ट्रेलिया में मिली अनोखी मकड़ी, शिकार की तकनीक में दिखी सर्वोच्च विशिष्टता