कैंसर के टीके से लेकर क्वांटम सुरक्षा तक, दुनिया बदलने वाली 10 नई तकनीकों पर WEF की नजर
नई दिल्ली। तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और आने वाले वर्षों में इसका असर हमारी सेहत, ऊर्जा, पर्यावरण, साइबर सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखाई दे सकता है। विश्व आर्थिक मंच (WEF) की 2026 की ‘टॉप 10 इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज’ रिपोर्ट में ऐसी 10 उभरती तकनीकों की पहचान की गई है, जो प्रयोगशालाओं से निकलकर वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल और बड़े स्तर पर विस्तार की ओर बढ़ रही हैं। इन तकनीकों में मरीज की जरूरत के हिसाब से तैयार होने वाली पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन, बिना ज्यादा पानी के लिथियम निकालने की तकनीक, बिजली के बिना ठंडक देने वाले नए पदार्थ, ‘फॉरएवर केमिकल्स’ को नष्ट करने की तकनीक और क्वांटम कंप्यूटिंग आधारित दवा खोज जैसी खोजें शामिल हैं। WEF के मुताबिक इन तकनीकों में एक बड़ा बदलाव यह है कि तकनीक अब ज्यादा व्यक्तिगत, स्थानीय और संसाधन-कुशल होती जा रही है।
कैंसर के इलाज में आ सकता है बड़ा बदलाव
रिपोर्ट में पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन को खास महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य हर मरीज के कैंसर की अलग-अलग आनुवंशिक विशेषताओं को समझकर उसके लिए वैक्सीन तैयार करना है। इस प्रक्रिया में मरीज के ट्यूमर का जेनेटिक विश्लेषण किया जाता है। इसके बाद ऐसे म्यूटेशन या प्रोटीन की पहचान की जाती है, जिन्हें मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली निशाना बना सके। उसी आधार पर तैयार mRNA वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम को कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और उन पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित करती है। WEF के अनुसार, कुछ हालिया क्लिनिकल ट्रायल में इम्यूनोथेरेपी के साथ पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन का इस्तेमाल करने पर कैंसर की वापसी या मृत्यु के जोखिम में कमी देखने को मिली है। हालांकि, यह तकनीक अभी विकास और क्लिनिकल उपयोग के विस्तार के दौर में है।
बिजली की नई तस्वीर दिखाएगी ‘Everything-to-Grid’
WEF की सूची में Everything-to-Grid Energy को पहले स्थान पर रखा गया है। इस तकनीक का विचार यह है कि इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और अन्य स्टोरेज सिस्टम केवल बिजली इस्तेमाल करने वाले उपकरण न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर ग्रिड को बिजली वापस भी दे सकें। इससे बिजली की मांग बढ़ने के समय अतिरिक्त ऊर्जा उपलब्ध कराई जा सकती है। खासकर सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल में यह तकनीक मददगार हो सकती है।
घंटों में निकलेगा लिथियम
बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के बीच Direct Lithium Extraction यानी सीधे लिथियम निकालने की तकनीक भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पारंपरिक तरीके से खारे पानी से लिथियम निकालने में लंबा समय और काफी पानी लग सकता है। नई तकनीक इंजीनियरिंग आधारित सिस्टम की मदद से ब्राइन से लिथियम को काफी तेजी से अलग कर सकती है। WEF के मुताबिक कुछ मामलों में यह प्रक्रिया घंटों में पूरी हो सकती है और पानी को दोबारा जमीन के नीचे भेजा जा सकता है।
बिना बिजली के ठंडक देने वाली तकनीक
गर्मी बढ़ने के साथ एयर कंडीशनिंग और कूलिंग की मांग भी बढ़ रही है, जिससे बिजली की खपत बढ़ती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए Passive Radiative Cooling Materials विकसित किए जा रहे हैं। ये खास पदार्थ अपनी सतह से गर्मी को विकिरण के जरिए अंतरिक्ष की ओर भेज सकते हैं। इससे भवनों और उपकरणों को बिना अतिरिक्त बिजली खर्च किए ठंडा रखने में मदद मिल सकती है।
‘फॉरएवर केमिकल्स’ से छुटकारे की उम्मीद
WEF की सूची में PFAS Destruction Technologies भी शामिल हैं। PFAS ऐसे रसायनों का समूह है जिन्हें लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहने के कारण ‘फॉरएवर केमिकल्स’ कहा जाता है। नई तकनीकों का उद्देश्य इन जटिल रसायनों को सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने के बजाय उन्हें तोड़कर कम हानिकारक पदार्थों में बदलना है। इससे पानी और पर्यावरण को लंबे समय तक होने वाले प्रदूषण से बचाने में मदद मिल सकती है। Precision Fermentation तकनीक में सूक्ष्मजीवों को एक तरह की जैविक फैक्ट्री की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इनके जरिए प्रोटीन, एंजाइम, दवाओं और अन्य उपयोगी पदार्थों का उत्पादन किया जा सकता है। इस तकनीक से पशुओं या बड़े पैमाने पर कृषि संसाधनों पर निर्भरता कम करने की संभावना है। इसका इस्तेमाल खाद्य उद्योग के साथ-साथ दवा, कॉस्मेटिक्स और अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ सकता है।
दवा को सही जगह पहुंचाएंगे Exosomes
Exosome Drug Delivery तकनीक का उद्देश्य दवाओं को शरीर में अधिक सटीक तरीके से लक्षित कोशिकाओं तक पहुंचाना है। Exosomes बेहद छोटे कण होते हैं, जो स्वाभाविक रूप से कोशिकाओं के बीच प्रोटीन और आनुवंशिक सामग्री पहुंचाते हैं। वैज्ञानिक इन्हें दवा पहुंचाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इससे कैंसर और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।
क्वांटम तकनीक बदलेगी दवा खोजने का तरीका
Quantum Simulation for Drug Discovery का मकसद दवा विकसित करने की प्रक्रिया को ज्यादा तेज और सटीक बनाना है। क्वांटम कंप्यूटर अणुओं के व्यवहार को बेहद सूक्ष्म स्तर पर मॉडल करने में मदद कर सकते हैं। इससे वैज्ञानिक किसी संभावित दवा के शरीर में काम करने के तरीके का अनुमान शुरुआती स्तर पर ही लगा सकते हैं। भविष्य में इससे असफल दवा परीक्षणों पर खर्च होने वाला समय और पैसा कम करने की उम्मीद है।
AI अब सिर्फ कंटेंट नहीं, दुनिया को समझेगा
रिपोर्ट में World Models को भी भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीक बताया गया है। ये AI सिस्टम सिर्फ डेटा में पैटर्न पहचानने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वीडियो, सेंसर और टेक्स्ट जैसी अलग-अलग जानकारियों से वास्तविक दुनिया के व्यवहार का मॉडल तैयार करने की कोशिश करेंगे। इसका इस्तेमाल रोबोटिक्स, जलवायु मॉडलिंग और अन्य ऐसे क्षेत्रों में हो सकता है जहां मशीनों के लिए वास्तविक दुनिया को समझना जरूरी है। सूची में अंतिम तकनीक Lattice-Based Cryptography है। यह ऐसी एन्क्रिप्शन तकनीक है जिसे भविष्य के शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटरों से होने वाले संभावित साइबर हमलों के खिलाफ अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। भविष्य में जब क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा एन्क्रिप्शन को तोड़ने में सक्षम हो सकते हैं, तब इस तरह की तकनीक डिजिटल डेटा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
तकनीक का भविष्य अब ज्यादा व्यक्तिगत और स्थानीय
WEF की 2026 की सूची सिर्फ नई मशीनों या सॉफ्टवेयर की कहानी नहीं बताती, बल्कि तकनीकी विकास की बदलती दिशा की ओर भी इशारा करती है। एक तरफ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज को मरीज के हिसाब से तैयार करने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ ऊर्जा और संसाधनों को स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल करने पर जोर बढ़ रहा है। रिपोर्ट में शामिल तकनीकों से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में तकनीक का लक्ष्य केवल ‘ज्यादा उत्पादन’ नहीं होगा, बल्कि कम संसाधनों में बेहतर परिणाम हासिल करना भी होगा। हालांकि इनमें से कई तकनीकें अभी विकास और परीक्षण के चरण में हैं, लेकिन इनके सफल होने पर स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण और डिजिटल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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