ओडिशा में मिले 5 शिशु ओरंगुटान की हालत स्थिर, सामान्य भोजन कर रहे
भुवनेश्वर (ओडिशा) [भारत]: नंदनकानन चिड़ियाघर के उप निदेशक ने मंगलवार को बताया कि भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर में विशेष देखरेख में रखे गए सभी पांच बचाए गए ओरंगुटान बच्चों की हालत स्थिर है। वे सामान्य रूप से भोजन कर रहे हैं और उनकी शारीरिक गतिविधियों में भी सुधार हुआ है।
तीन नर और दो मादा ओरंगुटान की निगरानी जारी
चिड़ियाघर के पशु चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए नैदानिक मूल्यांकन से पुष्टि हुई है कि सभी पांचों प्राइमेट, जिनमें तीन नर और दो मादा शामिल हैं, सहायक देखभाल और लगातार निगरानी पर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। सोमवार दोपहर थर्मल इमेजिंग के जरिए किए गए चिकित्सकीय मूल्यांकन में सभी पांचों शिशुओं के शरीर का तापमान 98.2°F से 99.0°F के बीच दर्ज किया गया, जो सामान्य शारीरिक सीमा में है।
पांचों का वजन भी किया गया
वजन के आकलन में नर 1 का वजन 4.990 किलोग्राम, नर 2 का 3.470 किलोग्राम और नर 3 का 2.850 किलोग्राम दर्ज किया गया। वहीं, मादा 1 का वजन 4.130 किलोग्राम और मादा 2 का वजन 2.080 किलोग्राम पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, सभी पांचों शिशु नियमित और स्वस्थ तरीके से भोजन कर रहे हैं।
गांव के पास मिले थे पांचों ओरंगुटान
9 सितंबर की सुबह ओडिशा के बालासोर डिवीजन के भोगराई ब्लॉक के बादपाली गांव के पास पांच ओरंगुटान पाए गए थे। इसके बाद वन विभाग ने जांच शुरू की कि ये जानवर वहां कैसे पहुंचे। बालासोर के डीएफओ इंदलकर प्रतीक प्रकाश के अनुसार, वन अधिकारियों को सुबह करीब 6 बजे एक वीएसएस सदस्य से पांच जानवरों के बारे में सूचना मिली थी। शुरुआत में उन्हें बंदर प्रजाति का माना गया था। डीएफओ ने बताया, "जब हमारे कर्मचारी मौके पर पहुंचे और भोगराई ब्लॉक के बरपाई गांव के पास स्थित जगह का निरीक्षण किया, तो उन्होंने पाया कि ये जानवर वास्तव में ओरंगुटान थे।"
भीड़ बढ़ने पर वन विभाग ने किया रेस्क्यू
अधिकारियों ने पाया कि सभी पांचों ओरंगुटान काफी छोटे थे और ज्यादा चल-फिर नहीं रहे थे, हालांकि वे सतर्क और सक्रिय थे। जानवरों को शुरुआत में मौके पर ही भोजन दिया गया। जैसे ही वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगी, वन अधिकारियों ने सभी ओरंगुटानों को रेस्क्यू किया और उचित जांच के लिए उन्हें उदयपुर सेक्शन कार्यालय ले गए।
तस्करी की संभावना से भी इनकार नहीं
डीएफओ ने कहा कि जानवरों की कम उम्र और सीमित गतिशीलता से पता चलता है कि वे अकेले लंबी दूरी तय नहीं कर सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि सियार, लोमड़ी, कुत्ते और लंगूर जैसे जानवरों की मौजूदगी के कारण उस इलाके में रात भर जीवित रहना उनके लिए मुश्किल होता। प्रकाश ने कहा, "तस्करी की संभावना है, लेकिन अभी हम निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकते क्योंकि हमें इसका कोई सबूत नहीं मिला है।" उन्होंने कहा कि ओरंगुटान इस क्षेत्र के मूल निवासी नहीं हैं और स्वाभाविक रूप से ऐसे आवासों में प्रवास नहीं करते हैं। इसलिए वन विभाग को मानवीय हस्तक्षेप का संदेह है। उन्होंने कहा, "हम इस बात की जांच करेंगे कि उन्हें कौन लाया, और तभी हम निश्चित रूप से कुछ कह पाएंगे।"
करीब एक साल के हैं पांचों शिशु
पांचों ओरंगुटान, जिनमें दो मादा और तीन नर हैं, लगभग एक वर्ष के हैं। वन अधिकारियों, पशु चिकित्सकों और जीवविज्ञानियों ने जानवरों की जांच की। वहीं, विभाग ने नंदनकानन और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के वैज्ञानिकों के साथ भी समन्वय किया है। घटना की जांच शुरू कर दी गई है। वन कर्मियों ने सबूतों की तलाश के लिए इलाके में तलाशी अभियान चलाया है। इसके साथ ही आसपास के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाएगी। डीएफओ ने कहा, "एक जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है और हम पुलिस विभाग, डब्ल्यूसीबी और एसटीएफ जैसी अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय करेंगे, क्योंकि हमें इन सभी के साथ मिलकर काम करना होगा।" उन्होंने कहा कि इस मामले में कई एजेंसियों के समन्वय की आवश्यकता है, क्योंकि ओरंगुटान एक अंतरराष्ट्रीय प्रजाति है, जो भारत की मूल निवासी नहीं है।
(एएनआई)
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