समिट में एआई को मानवीय उपयोग में लगाने पर जोर
नई दिल्ली। 'भारत के एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के आयोजन के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिक विशेषज्ञ की विशेष ज़ुटान का साक्षी बना। इसमें विचार-विमर्श एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का मानवीय हित में इस्तेमाल को आकार देने और इसमें अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी पर केंद्रित रहा।
भारत-रूस एआई सहयोग पर जोर
पैनल विचार-विमर्श में भारत और रूस के बीच लंबे समय चली आ रही संधियों और नई उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को और प्रगाढ़ करने की संभावनाओं को रेखांकित किया गया। इस पैनल चर्चा का आयोजन रुस्सोफ्ट एसोसिएशन, आक्सी टेक और रुस्सोफ्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष वेलेंटाइन मकरोव ने किया था। एएनआई के साथ भेंटवार्ता में मकरोव ने भारत के साथ अपने पहले के जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा-' में 1995 में पहली बार भारत आया था। रूस और भारत के पास यह अवसर है कि वे क्षमता का नया केंद्र स्थापित कर सकते हैं। इसके अलावा वे नया बड़ा बाजार खड़ा कर सकते हैं और प्रतिभाशाली अविष्कारकों पूल स्थापित कर सकते है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण एआई का प्रभाव काफी महत्वपूर्ण है।
वैश्विक सहयोग और नैतिक एआई पर जोर
एक अन्य समाचार के अनुसार, समिट में दुनिया के कई देशों के नेताओं, नीति-निर्माताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने सिर्फ हिस्सा ही नहीं लिया, बल्कि एक स्वर में भरोसे, संतुलन और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मेलन का केंद्र बिंदु यह था कि एआई का विकास केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि मानवता के हित, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक संतुलन के अनुरूप हो।
यह भी पढ़े: 5 साल पेट में रही सर्जिकल कैंची
https://www.primenewsnetwork.in/india/surgical-scissors-left-in-womans-stomach-for-5-years/144686