शोधकर्ताओं ने AI सिमुलेशन विकसित किया है, जो न्यूट

AI से खुला ब्रह्मांड का बड़ा रहस्य! न्यूट्रॉन तारों के विलय से भारी तत्वों के निर्माण का मिला नया सुराग

Cosmic Mystery Solved With AI Help

वॉशिंगटन डीसी [अमेरिका]: शोधकर्ताओं ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित सिमुलेशन विकसित किया है, जो न्यूट्रॉन तारा विलय के दौरान ब्रह्मांड के कई सबसे भारी तत्वों के निर्माण की प्रक्रिया का मॉडल तैयार करने में काफी तेजी लाता है। यह नया उपकरण इन शक्तिशाली विस्फोटों की भविष्यवाणियों को बेहतर बना सकता है और वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में किए गए प्रेक्षणों को पृथ्वी पर किए गए प्रयोगों से बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद कर सकता है।

एआई से मिलेगी भारी तत्वों के निर्माण की बेहतर समझ

शोधकर्ताओं ने एक नया कृत्रिम बुद्धिमत्ता-संचालित सिमुलेशन विकसित किया है, जो ब्रह्मांड में कई सबसे भारी तत्वों के निर्माण की प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण सुधार कर सकता है। जीएसआई/फेयर की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा तैयार किया गया यह मशीन लर्निंग मॉडल वैज्ञानिकों को न्यूट्रॉन तारा विलय और अन्य हिंसक तारकीय घटनाओं के दौरान होने वाली जटिल परमाणु प्रतिक्रियाओं का पहले की तुलना में कहीं अधिक कुशलता से अनुकरण करने की सुविधा देता है। इसके निष्कर्ष फिजिकल रिव्यू डी पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

आर-प्रक्रिया से बनते हैं भारी रासायनिक तत्व

ब्रह्मांड में पाए जाने वाले कई रासायनिक तत्व सुपरनोवा विस्फोटों और न्यूट्रॉन तारा विलय जैसी चरम ब्रह्मांडीय घटनाओं के दौरान बनते हैं। इन विस्फोटों से उत्पन्न ऊर्जा तीव्र न्यूट्रॉन कैप्चर यानी आर-प्रक्रिया (R-process) को संभव बनाती है। इस प्रक्रिया में परमाणु नाभिक तेजी से न्यूट्रॉन को अवशोषित करते हैं, जिनमें से कुछ प्रोटॉन में बदल जाते हैं। इससे नाभिक का आकार बढ़ता है और अंततः कई भारी तत्वों का निर्माण होता है।

जटिल गणनाओं को आसान बना रहा AI मॉडल

इन परमाणु प्रतिक्रियाओं का सिमुलेशन करना बेहद कठिन और समय लेने वाला कार्य है, क्योंकि इसके लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग शक्ति की आवश्यकता होती है। जीएसआई/फेयर के शोधकर्ता और अध्ययन के प्रथम लेखक डॉ. ओलिवर जस्ट ने बताया कि पारंपरिक मॉडल में सभी मापदंडों को शामिल करना मुश्किल होता है, इसलिए उन्हें सरल बनाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित नया मॉडल 'राइन (RHINE)' इस समस्या का अधिक प्रभावी समाधान प्रदान करता है।

डीप लर्निंग से बढ़ी सिमुलेशन की रफ्तार

'राइन' (RHINE) नामक यह प्रणाली डीप लर्निंग न्यूरल नेटवर्क की मदद से यह अनुमान लगाती है कि आर-प्रक्रिया के दौरान कितनी ऊर्जा मुक्त होगी। यह ऊर्जा तारकीय विस्फोटों के दौरान पदार्थ के निष्कासन, उसकी गति और उससे निकलने वाले प्रकाश को प्रभावित करती है। न्यूट्रॉन तारा विलय के दौरान दिखाई देने वाली इसी चमक को किलोनोवा कहा जाता है।

कम समय में अधिक सटीक परिणाम

हर बार जटिल परमाणु गणनाएं करने के बजाय, एआई मॉडल को पहले व्यापक संदर्भ डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसके बाद यह न्यूनतम कंप्यूटिंग संसाधनों के साथ तापन दरों का सटीक अनुमान लगा सकता है। मशीन लर्निंग मॉडल के प्रमुख डेवलपर डॉ. ज़ेवेई शियोंग ने बताया कि विस्तृत परीक्षणों में यह मॉडल संदर्भ डेटा से काफी मेल खाता है, जिससे कंप्यूटिंग समय में भारी बचत संभव हुई है।

भविष्य के अंतरिक्ष अनुसंधान में मिलेगी मदद

शोधकर्ताओं का मानना है कि RHINE भविष्य में और अधिक विस्तृत सिमुलेशन को संभव बनाएगा तथा आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों को भी काफी कम करेगा। इससे आगामी FAIR अनुसंधान केंद्र में होने वाले प्रयोगों को खगोलविदों द्वारा न्यूट्रॉन तारा विलय और तारकीय विस्फोटों के प्रेक्षणों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।

(ANI)

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