सूर्य से भी पुराना सोना! न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से बनी पृथ्वी तक पहुंची अरबों साल पुरानी धातु
नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि आपके गहनों में चमकने वाला सोना आखिर बना कैसे? वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन ने इस सवाल का बेहद दिलचस्प जवाब दिया है। शोध के मुताबिक, पृथ्वी पर मौजूद कुछ सोना सूर्य से भी पुराना है और इसकी उत्पत्ति अरबों वर्ष पहले दो न्यूट्रॉन तारों की भीषण टक्कर से हुई थी। यह खोज ब्रह्मांड की उत्पत्ति और पृथ्वी के निर्माण को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से बना सोना
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं तो अत्यधिक ऊर्जा और दबाव पैदा होता है। इस प्रक्रिया में सोना, प्लैटिनम और यूरेनियम जैसे भारी तत्वों का निर्माण होता है। बाद में यही तत्व अंतरिक्ष में फैलकर ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों का हिस्सा बन जाते हैं।
2017 की खोज बनी सबसे बड़ा सबूत
इस सिद्धांत को 2017 में उस समय सबसे मजबूत आधार मिला, जब वैज्ञानिकों ने पहली बार दो न्यूट्रॉन तारों की टक्कर से उत्पन्न गुरुत्वाकर्षण तरंगों और प्रकाश संकेतों को एक साथ दर्ज किया। इस घटना को "किलोनोवा" नाम दिया गया। विश्लेषण में पाया गया कि इस विस्फोट से बड़ी मात्रा में भारी तत्व बने, जिनमें सोना भी शामिल था। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी तरह की घटनाओं से बना सोना बाद में पृथ्वी तक पहुंचा।
पृथ्वी तक कैसे पहुंचा सोना?
शोधकर्ताओं के अनुसार, न्यूट्रॉन तारों की टक्कर के बाद बने भारी तत्व गैस और धूल के रूप में अंतरिक्ष में फैल गए। करोड़ों वर्षों बाद इन्हीं पदार्थों से सौर मंडल और पृथ्वी का निर्माण हुआ। इसी कारण आज पृथ्वी पर मिलने वाला सोना अरबों वर्ष पुराना माना जाता है।
ब्रह्मांड को समझने में मिलेगी नई मदद
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अध्ययन केवल सोने की उत्पत्ति तक सीमित नहीं है। इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि ब्रह्मांड में भारी तत्व कैसे बने और ग्रहों का निर्माण किन प्रक्रियाओं से हुआ।
आगे भी जारी रहेगा शोध
शोधकर्ता अब भविष्य में होने वाली न्यूट्रॉन तारों की टक्करों का और अधिक गहराई से अध्ययन करेंगे। उनका मानना है कि इससे ब्रह्मांड के विकास और पृथ्वी पर मौजूद बहुमूल्य धातुओं की उत्पत्ति से जुड़े कई नए रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।
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