भौतिक स्थिरांकों में मामूली बदलाव से असंभव हो सकता है जीवन? वैज्ञानिकों का नया अध्ययन
लंदन: वैज्ञानिकों ने एक ऐसे संबंध का पता लगाया है, जो ब्रह्मांड में जीवन के अस्तित्व को समझने में मदद कर सकता है। अध्ययन के मुताबिक, प्रकृति के मूलभूत भौतिक स्थिरांकों में मामूली बदलाव भी तरल पदार्थों की श्यानता यानी उनके बहने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इससे कोशिकाओं के भीतर होने वाली जरूरी जैविक प्रक्रियाएं बाधित हो सकती हैं।
भौतिकी के नियम और जीवन के बीच संबंध
साइंसडेली के अनुसार, साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन लंदन के क्वीन मैरी विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी कोस्त्या ट्राचेंको ने किया है। उनके सैद्धांतिक विश्लेषण में सामने आया कि ब्रह्मांड के मूलभूत भौतिक स्थिरांकों के मान ऐसे होने चाहिए, जो तरल पदार्थों को जीवन के अनुकूल तरीके से बहने दें। यह शोध एक अहम सवाल उठाता है कि प्रकृति के मूलभूत नियमों के मान ऐसे क्यों हैं, जो जीवन के अस्तित्व के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करते हैं।
क्या हैं मूलभूत भौतिक स्थिरांक?
मूलभूत भौतिक स्थिरांक वे निश्चित राशियां हैं, जो ब्रह्मांड में पदार्थ और ऊर्जा के व्यवहार को नियंत्रित करती हैं। इनमें इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, उसका विद्युत आवेश और प्लैंक स्थिरांक शामिल हैं। प्लैंक स्थिरांक क्वांटम यांत्रिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन स्थिरांकों के मान परमाणुओं, रासायनिक बंधों और तारों के भीतर होने वाली परमाणु प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। यही प्रतिक्रियाएं कार्बन और ऑक्सीजन जैसे उन तत्वों के निर्माण में योगदान देती हैं, जो जीवन के लिए जरूरी हैं। हालांकि, वैज्ञानिक अब भी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि इन स्थिरांकों के मौजूदा मान ही क्यों हैं।
तरल पदार्थों की श्यानता क्यों है महत्वपूर्ण?
श्यानता बताती है कि कोई तरल पदार्थ बहने का कितना प्रतिरोध करता है। पानी आसानी से बहता है, जबकि शहद और तारकोल जैसे पदार्थ अधिक गाढ़े होने के कारण धीरे-धीरे बहते हैं। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2020 में किए गए अपने एक अध्ययन में दिखाया था कि मूलभूत भौतिक स्थिरांक तरल पदार्थों की श्यानता की एक न्यूनतम सीमा निर्धारित करते हैं। इसके बाद वर्ष 2023 में हुए अध्ययन में इस संबंध के संभावित जैविक प्रभावों की जांच की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार, तरल पदार्थों के बहने का तरीका जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोशिकाओं के भीतर पोषक तत्वों का पहुंचना, अपशिष्ट पदार्थों का बाहर निकलना और रासायनिक प्रतिक्रियाओं का होना इसी पर निर्भर करता है।
भौतिक स्थिरांकों में बदलाव से कैसे प्रभावित होगा जीवन?
हर जीवित कोशिका के भीतर अणुओं की आवाजाही लगातार होती रहती है। इसके अलावा, विसरण की प्रक्रिया के जरिए कण तरल पदार्थों में फैलते हैं और कोशिकाओं के भीतर जरूरी रासायनिक क्रियाओं को संभव बनाते हैं। यदि तरल पदार्थ बहुत अधिक गाढ़े हो जाएं, तो पोषक तत्वों और अन्य अणुओं की आवाजाही बाधित हो सकती है। वहीं, श्यानता में अत्यधिक कमी आने से भी जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी प्रवाह प्रभावित हो सकता है। ट्राचेंको के मुताबिक, यदि पानी की श्यानता तारकोल जितनी हो जाए, तो जीवन का अपने मौजूदा स्वरूप में अस्तित्व बनाए रखना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह संबंध केवल पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी जीवों पर लागू हो सकता है जो तरल पदार्थों पर निर्भर हैं।
मूलभूत स्थिरांकों में कुछ प्रतिशत बदलाव भी पड़ सकता है असर
ट्राचेंको ने सुझाव दिया कि जीवन के अनुकूल भौतिक स्थिरांकों की सीमा अपेक्षाकृत संकीर्ण हो सकती है। उनके अनुसार, प्लैंक स्थिरांक या इलेक्ट्रॉन के आवेश जैसे कुछ स्थिरांकों में केवल कुछ प्रतिशत का बदलाव भी रक्त की श्यानता को शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए अनुपयुक्त बना सकता है। हालांकि, ये निष्कर्ष सैद्धांतिक मॉडलों पर आधारित हैं। वैज्ञानिकों ने प्रयोग के जरिए वास्तव में मूलभूत स्थिरांकों को बदलकर इनके प्रभावों का परीक्षण नहीं किया है। इसलिए जीवन के अस्तित्व के लिए जरूरी सटीक सीमाएं अभी स्पष्ट नहीं हैं।
जीवन के लिए जरूरी तत्व बनना ही पर्याप्त नहीं
ब्रह्मांड में जीवन की संभावना को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से अध्ययन कर रहे हैं। तारों के भीतर होने वाली परमाणु प्रतिक्रियाएं कार्बन और ऑक्सीजन जैसे भारी तत्वों के निर्माण में मदद करती हैं। ये तत्व बाद में जीवित प्राणियों के आवश्यक घटक बनते हैं। लेकिन अध्ययन के मुताबिक, जीवन के लिए जरूरी तत्वों का बनना और जीवन का वास्तव में काम कर पाना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी काल्पनिक ब्रह्मांड में जीवन के लिए आवश्यक तत्व मौजूद हो सकते हैं, लेकिन वहां के तरल पदार्थ इतने गाढ़े हो सकते हैं कि कोशिकाओं के भीतर जरूरी प्रक्रियाएं संभव न हों। इससे संकेत मिलता है कि जीवन के अनुकूल ब्रह्मांड के लिए केवल तारों, ग्रहों और जटिल रसायनों का बनना पर्याप्त नहीं है। तरल पदार्थों के भौतिक गुण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
रक्त पर हुए अध्ययन में सामने आया महत्वपूर्ण संबंध
इस शोध को आगे बढ़ाते हुए ट्राचेंको और उनके सहयोगियों ने जनवरी 2025 में द यूरोपियन फिजिकल जर्नल ई में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में रक्त की श्यानता की जांच की। पानी के विपरीत, रक्त एक जटिल तरल पदार्थ है, जिसमें प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाएं, प्लेटलेट्स और अन्य घटक मौजूद होते हैं। इसकी श्यानता इन घटकों के आपसी व्यवहार पर भी निर्भर करती है। लाल रक्त कोशिकाएं आपस में समूह बना सकती हैं, जिससे रक्त के बहने का प्रतिरोध बढ़ सकता है। वहीं, रक्त के प्रवाह की गति बढ़ने पर ये समूह टूट सकते हैं और रक्त का बहना आसान हो सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि रक्त की जटिल संरचना के बावजूद, उसकी श्यानता मूलभूत भौतिक स्थिरांकों से जुड़े सैद्धांतिक पैमाने के करीब रहती है। उन्होंने संभावना जताई कि एक-दूसरे के करीब मौजूद रक्त कोशिकाओं के बीच होने वाली अंतःक्रियाएं इस संबंध को समझने में मदद कर सकती हैं।
क्या ब्रह्मांड के भौतिक नियम विकसित हुए हैं?
यह शोध एक और बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचता है कि प्रकृति के मूलभूत स्थिरांकों के मान ऐसे क्यों हैं, जो कई अलग-अलग भौतिक प्रक्रियाओं को एक साथ संभव बनाते हैं। ट्राचेंको ने एक संभावित परिकल्पना पेश की है कि तारों में भारी तत्वों के निर्माण और तरल पदार्थों के जरिए जीवन को बनाए रखने के लिए अलग-अलग भौतिक परिस्थितियों की जरूरत हो सकती है। उन्होंने इसकी तुलना जैविक विकास से भी की, जिसमें अलग-अलग उपयोगी विशेषताएं विभिन्न प्रक्रियाओं के जरिए उभरती हैं। हालांकि, यह फिलहाल एक परिकल्पना ही है। वैज्ञानिकों ने अभी तक यह साबित नहीं किया है कि मूलभूत भौतिक स्थिरांक किसी विकासवादी प्रक्रिया से बदलते हैं या उनके मौजूदा मानों के पीछे क्या कारण है। फिर भी, यह अध्ययन ब्रह्मांड के मूलभूत नियमों और जीवन के अस्तित्व के बीच संबंध को समझने की दिशा में एक नया नजरिया प्रस्तुत करता है। वैज्ञानिकों के लिए पानी का बहना और शरीर में रक्त का संचार जैसी प्रक्रियाएं भी इस सवाल के जवाब तलाशने में महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकती हैं।
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