CSIR-CCMB के वैज्ञानिकों ने खोजा नया ‘वायरल अलार्म स्विच’, वायरस से लड़ने में मदद करेगा DZIP3 प्रोटीन
हैदराबाद (तेलंगाना): हैदराबाद में CSIR-सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CSIR-CCMB) में डॉ. संतोष चौहान के ग्रुप ने एक जरूरी मैकेनिज्म खोजा है, जिसका इस्तेमाल इंसानी कोशिकाएं वायरल इन्फेक्शन का पता लगाने और उनसे लड़ने के लिए करती हैं। स्टडी में एक दोहरी भूमिका निभाने वाले प्रोटीन की पहचान की गई है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम के लिए शुरुआती चेतावनी देने वाले सेंसर और एक्टिवेटर के तौर पर काम करता है। यह स्टडी अब द EMBO जर्नल में प्रकाशित हुई है। जब कोई वायरस किसी सेल पर हमला करता है, तो होस्ट को घुसपैठिए को तुरंत पहचानना चाहिए और वायरस के बढ़ने से पहले अलार्म बजाना चाहिए। लगभग सात साल पहले, डॉ. चौहान के ग्रुप ने यह सोचा था कि इंसानी प्रोटीन का एक खास ग्रुप दोहरी भूमिका निभा सकता है: सीधे वायरल जेनेटिक मटीरियल का पता लगाना और इम्यून अलार्म बजाने के लिए जरूरी सेलुलर प्रोटीन को तुरंत टैग करना।
DZIP3 प्रोटीन वायरल RNA का पता लगाकर होता है एक्टिव
नई स्टडी में, टीम ने पाया है कि DZIP3 नाम का एक प्रोटीन ठीक यही भूमिका निभाता है। जब DZIP3 किसी सेल के अंदर वायरल RNA का पता लगाता है, तो यह खुद को चालू करने के लिए अपना आकार बदल लेता है। एक बार एक्टिवेट होने के बाद, यह सेल की एनर्जी फैक्ट्री, माइटोकॉन्ड्रिया में चला जाता है, जहां यह मुख्य इम्यून डिफेंस प्रोटीन को टैग और एक्टिवेट करता है। यह एक शक्तिशाली इम्यून रिस्पॉन्स को ट्रिगर करता है, जिससे टाइप-I इंटरफेरॉन नाम के डिफेंसिव मॉलिक्यूल निकलते हैं, जो वायरस को बढ़ने से रोकते हैं।
कई खतरनाक वायरस के खिलाफ मिल सकती है सुरक्षा
टीम ने दिखाया कि यह नया खोजा गया रास्ता SARS-CoV-2, चिकनगुनिया और जापानी एन्सेफलाइटिस सहित कई बीमारी पैदा करने वाले वायरस के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान करता है। इस खोज के आधार पर, डॉ. चौहान की टीम अब DZIP3 एक्टिविटी को टारगेट करने और बढ़ाने के लिए छोटे मॉलिक्यूल वाले ड्रग कैंडिडेट विकसित कर रही है, जिसका लक्ष्य शरीर की प्राकृतिक एंटीवायरल इम्यूनिटी को कृत्रिम रूप से बढ़ाना है।
भविष्य में एंटीवायरल थेरेपी विकसित करने में मिलेगी मदद
CSIR-CCMB के सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट और स्टडी के मुख्य लेखक डॉ. संतोष चौहान ने कहा, "यह पता लगाना कि DZIP3 वायरल RNA को कैसे सेंस करता है और सीधे सेल की इम्यून मशीनरी को कैसे ट्रिगर करता है, हमें इंसानी इम्यूनिटी की गहरी समझ देता है।" उन्होंने कहा, "इन प्राकृतिक सेल डिफेंस मैकेनिज्म को समझने से रोमांचक नई संभावनाएं खुलती हैं, और छोटे मॉलिक्यूल्स से DZIP3 को टारगेट करने से उभरते वायरल खतरों के खिलाफ व्यापक प्रभाव वाली एंटीवायरल थेरेपी मिल सकती है।" डॉ. रिंकू साहू इस स्टडी के पहले लेखक थे, जिनके साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोगी थे। इस रिसर्च को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने फंड किया था।
(ANI)
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