I4C और CERT-In ने AI एजेंट्स से बढ़ते साइबर हमलों

बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर AI से साइबर हमले का खतरा, 14C ने जारी की चेतावनी

I4C Alerts Banks on AI Cyberattack Threat

नई दिल्ली: इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) और CERT-In की नेशनल साइबरक्राइम थ्रेट एनालिसिस यूनिट (NCTAU) ने बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और फिनटेक कंपनियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से किए जा रहे साइबर हमलों को लेकर अलर्ट किया है। 14C की एडवाइजरी के मुताबिक, साइबर अपराधी AI एजेंट्स का इस्तेमाल कर तेजी से साइबर हमलों को अंजाम दे रहे हैं और वित्तीय संस्थानों को निशाना बना रहे हैं।

AI की मदद से करोड़ों के अनधिकृत लेनदेन

14C की एडवाइजरी में कहा गया है, "ये हमले आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किए जा रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एजेंट्स की मदद से मशीन की गति से अंजाम दिए जा रहे हैं। अलग-अलग मामलों में फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम और APIs के जरिए करोड़ों रुपये के अनधिकृत लेनदेन सामने आए हैं।" एडवाइजरी में बताया गया है कि साइबर अपराधी संस्थानों के सिस्टम में सेंध लगाने के लिए पुराने सॉफ्टवेयर और इंटरनेट से जुड़े गलत तरीके से कॉन्फिगर किए गए सर्वर या IT सिस्टम का फायदा उठाते हैं।

पेमेंट सिस्टम और APIs को बनाया जा रहा निशाना

एडवाइजरी के मुताबिक, साइबर हमलों में ग्राहकों और शिकायतों से जुड़े इंटरफेस भी निशाने पर हैं। हैकर्स इसके बाद ऑटोमेटेड फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम या पेमेंट और फंड ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष इंटरफेस यानी APIs को टारगेट करते हैं। इसमें कहा गया है, "एजेंटिक AI फ्रेमवर्क का इस्तेमाल मशीन की गति से साइबर हमलों को संभव बनाता है।" साइबर हमलों के जरिए हासिल की गई रकम को बाद में 'म्यूल' खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल अपराधी अवैध रूप से हासिल किए गए पैसों को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए करते हैं। ये खाते कई बैंकों में फैले हो सकते हैं, जिससे रकम को तत्काल भुगतान सेवा (IMPS) और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) के जरिए तेजी से ट्रांसफर या निकाला जा सकता है। एडवाइजरी में कहा गया है, "इसके बाद अपराधी रिकॉर्ड हटा देते हैं और अपनी गतिविधियों के निशान छिपाते हैं, ताकि जांच करना मुश्किल हो जाए।"

वित्तीय संस्थानों को दिए गए ये सुरक्षा निर्देश

14C की एडवाइजरी में बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों को साइबर हमलों से बचने के लिए कई जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है।

  • - APIs की पूरी सूची तैयार करें: पेमेंट के लिए इस्तेमाल होने वाले सभी डिजिटल इंटरफेस (APIs) की पूरी सूची रखें। पुराने, अप्रयुक्त और टेस्टिंग के लिए बनाए गए इंटरफेस को हटा दें या बंद कर दें।
  • - सुरक्षा टीमों के बीच तालमेल बढ़ाएं: बैंक के मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO) की टीम, ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग टीम और IT टीम को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि API से जुड़े हमलों का खतरा कम किया जा सके।
  • - सिस्टम की सुरक्षा जांच करें: साइबर अपराधियों को एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक पहुंचने से रोकने के लिए सिक्योरिटी आर्किटेक्चर की पूरी समीक्षा करें।
  • - लेनदेन पर रखें नजर: ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग टीम को लेनदेन के विवरण, लाभार्थियों की प्रोफाइल और ट्रांजैक्शन की संख्या या रकम में अचानक होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।
  • - जांच पूरी होने के बाद ही भेजें पैसा: यह सुनिश्चित किया जाए कि KYC और जरूरी मंजूरी समेत सभी जांच पूरी होने के बाद ही फंड ट्रांसफर किया जाए।
  • - साइबर हमलों का परीक्षण करें: अधिकृत रेड टीम एक्सरसाइज के जरिए मशीन की गति से होने वाले साइबर हमलों का परीक्षण करें और देखें कि सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) और पेमेंट कंट्रोल सिस्टम कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं।

(ANI)

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