इंडोनेशिया में भारतीय दूतावास ने पेश किया AI अवतार ‘देवी’, संस्कृति से लेकर व्यापार तक की देगा जानकारी
जकार्ता [इंडोनेशिया]: इंडोनेशिया में भारत के राजदूत संदीप चक्रवर्ती ने बताया कि जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास ने ‘देवी’ नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवतार पेश किया है। इसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति, यात्रा, छात्रवृत्ति, व्यापार, निवेश के अवसरों और कांसुलर सेवाओं से संबंधित जानकारियों को लोगों तक पहुंचाना है।
सोशल मीडिया पर दूतावास ने कराया ‘देवी’ का परिचय
मंगलवार को X पर एक पोस्ट में जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास ने नए AI अवतार का परिचय देते हुए कहा, "मिलिए देवी से, जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास का नया AI चेहरा!" दूतावास ने कहा, "संस्कृति, यात्रा, छात्रवृत्तियां, व्यापार, निवेश के अवसर और कांसुलर अपडेट - सब कुछ अब आपके करीब! भारत-इंडोनेशिया साझेदारी से जुड़ी कहानियां और अपडेट आपके लिए ला रहे हैं।" अपडेट के लिए लोगों से अकाउंट को फॉलो करने का आग्रह करते हुए दूतावास ने आगे कहा, "हमें फॉलो करें और देवी को नमस्कार कहें! सूचित रहें, जुड़े रहें!"
नवरात्रि और दुर्गा पूजा पर साझा की पहल
नवरात्रि और दुर्गा पूजा के अवसर पर इस पहल को साझा करते हुए संदीप चक्रवर्ती ने X पर एक पोस्ट में कहा, "नवरात्रि और दुर्गा पूजा के शुभ अवसर पर, हमारा एआई अवतार देवी अपने अनुयायियों का मार्गदर्शन करने के लिए यहां मौजूद है।" इस पहल का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के माध्यम से दूतावास की गतिविधियों और व्यापक भारत-इंडोनेशिया साझेदारी के बारे में जानकारी को ऑनलाइन दर्शकों तक पहुंचाना है।
भारत और इंडोनेशिया के बीच संबंधों में हुआ विस्तार
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। वर्ष 2014 से भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में राजनीतिक, सुरक्षा, रक्षा, वाणिज्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। हाल ही में, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने 12 और 13 सितंबर को 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत का दौरा किया।
एस जयशंकर ने AI के नियमन और सुरक्षा पर दिया जोर
इस बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास में नियमन, सुरक्षा उपायों और अधिक समावेशिता का आह्वान किया है। उनका कहना है कि इस तकनीक का रोजमर्रा की जिंदगी पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा और इसके उपयोग तथा जिम्मेदारी पर गंभीर बहस की आवश्यकता है। मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के प्रधान संपादक जॉन मिकलेथवेट के साथ बातचीत में जयशंकर ने कहा कि AI की तुलना परमाणु प्रौद्योगिकी सहित अन्य तकनीकों से करना कठिन है, क्योंकि इसके व्यापक उपयोग हैं और इससे प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या भी बहुत अधिक है।
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर AI के प्रभाव को लेकर चिंता
जयशंकर ने लोकतांत्रिक समाजों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित प्रभावों, विशेष रूप से राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर इसके असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “एक लोकतांत्रिक समाज के रूप में, इस बात को लेकर जायज़ चिंताएँ होंगी कि यह राजनीति को कैसे प्रभावित करेगा, यह राजनीतिक प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करेगा, जो लोकतांत्रिक राजनीति की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
(एएनआई)
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