भारत में पहले स्नो लेपर्ड पॉपुलेशन असेसमेंट इन इंड

भारत के पहले स्नो लेपर्ड सर्वे में 718 हिम तेंदुए दर्ज, अकेले लद्दाख में 477; कीर्ति वर्धन सिंह ने दी जानकारी

India Records 718 Snow Leopards, Ladakh Leads with 477

नई दिल्ली: भारत में पहले स्नो लेपर्ड पॉपुलेशन असेसमेंट इन इंडिया (SPAI) सर्वे के मुताबिक, भारतीय हिमालयी क्षेत्रों में 718 स्नो लेपर्ड दर्ज किए गए हैं, जिनमें लद्दाख में 477 शामिल हैं। यह बात केंद्रीय विदेश और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इंटरनेशनल स्नो लेपर्ड डे के मौके पर कही। X पर एक पोस्ट में, सिंह ने स्नो लेपर्ड, जिसे "घोस्ट ऑफ द माउंटेंस" भी कहा जाता है, को बचाने के लिए भारत की कोशिशों पर जोर दिया और ऊंचाई वाले इलाकों में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। सिंह ने कहा, "#InternationalSnowLeopardDay पर, हम 'घोस्ट ऑफ द माउंटेंस' को बचाने के लिए भारत के समर्पण का जश्न मनाते हैं।" उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को भी श्रेय दिया और कहा कि भारत ऊंचाई वाले इलाकों में वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रयासों में आगे है। मंत्री ने लिखा, "माननीय PM श्री @narendramodi जी के जैव विविधता के विजन से प्रेरित होकर, भारत ऊंचाई वाले इलाकों में वन्यजीवों के संरक्षण में आगे है।"

पहले सर्वे में सामने आए 718 स्नो लेपर्ड

पहले SPAI सर्वे के नतीजों का जिक्र करते हुए, सिंह ने कहा कि आकलन से पता चला है कि पूरे भारतीय हिमालय में 718 स्नो लेपर्ड हैं, जिनमें लद्दाख में अनुमानित आबादी 477 है। मंत्री ने प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के जरिए इस प्रजाति को सुरक्षित रखने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। सिंह ने अपनी पोस्ट में कहा, "भारत सरकार @moefcc प्राकृतिक आवासों के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी के जरिए इस प्रतिष्ठित प्रजाति का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।" मंत्री की बातों ने भारत के ऊंचाई वाले हिमालयी इलाकों में स्नो लेपर्ड और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए संरक्षण प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया।

इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस को मिले विशेष अधिकार

इस बीच, सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियां) अधिनियम, 1947 के तहत इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) और उसके अधिकारियों को विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां दी हैं। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि यह कदम बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। उन्होंने बताया कि इन विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों के साथ, IBCA को दुनिया भर में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए सहयोग, जानकारी के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने वाले वैश्विक मंच के रूप में प्रभावी ढंग से काम करने के लिए जरूरी अधिकार मिलते हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी एक राजपत्र अधिसूचना ने इस घटनाक्रम को औपचारिक रूप दिया।

बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने X पर लिखा, "यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियां) अधिनियम, 1947 के तहत इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, उसके प्रतिनिधियों और अधिकारियों को विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां देने वाली राजपत्र अधिसूचना जारी की है। यह अहम कदम बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के भारत के पक्के वादे को दिखाता है। बड़ी बिल्लियों का संरक्षण उनके पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और उनकी सुरक्षा करने में भी जरूरी है और इसलिए, हमारे ग्रह की भलाई के लिए भी जरूरी है।"

(ANI)

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