भारतीय कंपनियां एआई, टेक्नोलॉजी और प्रतिभा हासिल करने के लिए बढ़ा रही हैं अधिग्रहण: क्रिसिल
नई दिल्ली [भारत]: क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत में विलय और अधिग्रहण की गतिविधियां बढ़ने के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और कंज्यूमर बिजनेस जैसे विभिन्न क्षेत्रों की भारतीय कंपनियां टेक्नोलॉजी, प्रतिभा और बौद्धिक संपदा क्षमताएं हासिल करने के लिए अधिग्रहण का सहारा ले रही हैं।
कंपनियों के लिए रणनीतिक हथियार बन रहे विलय और अधिग्रहण
रेटिंग एजेंसी का कहना है कि विलय और अधिग्रहण अब विकास के एक आकस्मिक विकल्प से विकसित होकर उन कंपनियों के लिए प्रमुख रणनीतिक उपकरण बन रहे हैं, जो तेजी से विस्तार करना चाहती हैं, नए बाजारों में प्रवेश करना चाहती हैं और ऐसी क्षमताएं हासिल करना चाहती हैं जिन्हें आंतरिक रूप से विकसित करने में अधिक समय लगता है। क्रिसिल रेटिंग्स के प्रबंध निदेशक सुबोध राय ने कहा, "भारतीय कॉरपोरेट विकास को गति देने, बाजार पहुंच का विस्तार करने और ऐसी क्षमताएं हासिल करने के लिए विलय और अधिग्रहण का तेजी से उपयोग कर रहे हैं जिन्हें स्वाभाविक रूप से विकसित करने में वर्षों लग जाते हैं। यह वार्षिक सौदों की संख्या में परिलक्षित होता है, जो वित्त वर्ष 2017 से दोगुनी से अधिक हो गई है।"
20 क्षेत्रों में करीब 600 सौदों का विश्लेषण
क्रिसिल के विश्लेषण में वित्तीय सेवाओं, अवसंरचना, निजी इक्विटी-आधारित और आंतरिक लेनदेन को छोड़कर, 20 क्षेत्रों में 500 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के लगभग 600 सौदों को शामिल किया गया है। अधिग्रहण रणनीति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग है। फार्मा और हेल्थकेयर, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंज्यूमर बिजनेस कंपनियां टेक्नोलॉजी, टैलेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए अधिग्रहण कर रही हैं। वहीं, सीमेंट और मेटल कंपनियां एकीकरण के लिए और निर्माण की समयसीमा को चार-छह साल से घटाकर एक-तीन साल करने के लिए अधिग्रहण कर रही हैं।
मजबूत बैलेंस शीट से मिल रहा समर्थन
क्रिसिल ने कहा कि मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट भी मौजूदा विलय और अधिग्रहण चक्र को समर्थन दे रही हैं। ऑर्गेनिक पूंजीगत व्यय में कमी, कम लीवरेज और विवेकपूर्ण फंडिंग ने कंपनियों की अधिग्रहण से जुड़े जोखिमों को झेलने की क्षमता बढ़ाई है। क्रिसिल द्वारा रेटेड लगभग 3,200 कंपनियों में औसत नेट डेट-टू-ईबिटडा अनुपात पिछले वित्त वर्ष में लगभग 1.3 गुना था, जबकि वित्त वर्ष 2017 में यह लगभग 2.4 गुना था।
सफल सौदों के लिए बेहतर क्रियान्वयन जरूरी
हालांकि, क्रियान्वयन अभी भी महत्वपूर्ण है। क्रिसिल द्वारा 100 बड़े डेट-फंडेड सौदों की समीक्षा में पाया गया कि इनमें से दो-तिहाई सौदे उसकी अपेक्षाओं पर खरे उतरे। राय ने कहा, "सफल सौदों ने एक-दो साल के भीतर 20-80% तक पैमाने का विस्तार किया, भौगोलिक पहुंच को बढ़ाया और तालमेल बनने के साथ ही दूसरे वर्ष से मार्जिन में सुधार किया।"
एकीकरण और नियामकीय देरी बनी चुनौती
शेष एक-तिहाई मामलों में, जो अपेक्षित व्यावसायिक परिणामों से कम रहे, उनमें से लगभग आधे मामलों में एकीकरण संबंधी चुनौतियां प्रमुख थीं। वहीं, नियामकीय देरी और सीमा पार निष्पादन संबंधी समस्याओं का योगदान लगभग एक-पांचवां था। अधिग्रहण के बाद क्रेडिट परिणाम भी काफी हद तक स्थिर रहे हैं। क्रिसिल रेटिंग्स के उप मुख्य रेटिंग अधिकारी मनीष गुप्ता ने कहा, "लगभग तीन-चौथाई रेटिंग्स को अधिग्रहण के बाद पुनः पुष्ट या अपग्रेड किया गया, और लगभग 60% अधिग्रहणकर्ताओं ने दो वर्षों के भीतर योजना के अनुसार या उससे पहले ही अपना ऋण कम कर लिया।"
आंतरिक क्षमता निर्माण के साथ संतुलन जरूरी
क्रिसिल ने आगे कहा कि भारतीय कंपनियों की सफलता अधिग्रहण आधारित विस्तार और आंतरिक क्षमता निर्माण के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर करेगी। इसके साथ ही नवाचार, प्रौद्योगिकी और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में निरंतर निवेश करना भी आवश्यक होगा। रेटिंग एजेंसी ने कहा, "विलय और अधिग्रहण से विकास में तेजी आ सकती है, लेकिन दीर्घकालिक मूल्य सृजन अनुशासित पूंजी आवंटन, मजबूत क्रियान्वयन और मुख्य क्षमताओं में निरंतर निवेश पर निर्भर करेगा।"
(एएनआई)
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