इमली के जीनोम से खुला स्वाद और औषधीय गुणों का रहस्य, भारतीय वैज्ञानिकों की बड़ी खोज
खट्टी-मीठी यादों से विज्ञान की बड़ी खोज तक
भारतीय रसोई का अहम हिस्सा और बचपन की खट्टी-मीठी यादों से जुड़ी इमली अब वैज्ञानिक शोध का भी बड़ा विषय बन गई है। भारतीय वैज्ञानिकों ने पहली बार इमली के पूरे जीनोम (Genome) का खाका तैयार किया है। इस शोध से इमली के अनोखे स्वाद, सुगंध, औषधीय गुणों और करोड़ों वर्षों की विकास यात्रा से जुड़े कई अहम रहस्यों का खुलासा हुआ है।
IISER भोपाल के वैज्ञानिकों ने किया शोध
यह अध्ययन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER), भोपाल के वैज्ञानिकों ने किया है। शोध का नेतृत्व डॉ. विनीत कुमार शर्मा ने किया, जबकि टीम में मिताली सिंह, मनोहर बिष्ट, अभिजीत एम. जी. और श्रुति महाजन शामिल रहे। इस शोध के नतीजे प्रतिष्ठित जर्नल Molecular Horticulture में प्रकाशित हुए हैं।
12 गुणसूत्रों में मिले 48,867 जीन
वैज्ञानिकों ने इमली के 12 गुणसूत्रों (क्रोमोसोम्स) का अध्ययन कर करीब 48,867 प्रोटीन बनाने वाले जीनों की पहचान की है। ये जीन फल के विकास, पर्यावरणीय तनाव सहने की क्षमता और पेड़ की कई महत्वपूर्ण जैविक विशेषताओं से जुड़े हैं। रिसर्च में पता चला कि इमली ने करोड़ों वर्ष पहले अपने पूरे जीनोम की स्वतंत्र रूप से प्रतिलिपि (Genome Duplication) बनाई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी प्रक्रिया ने इमली को बदलती जलवायु के अनुरूप ढलने, नए जैविक गुण विकसित करने और उसके विशिष्ट स्वाद व औषधीय गुण हासिल करने में मदद की। अध्ययन में यह भी सामने आया कि इमली और अंगूर के पूर्वज लगभग 11.7 करोड़ वर्ष पहले एक-दूसरे से अलग हुए थे।
खट्टे स्वाद का भी मिला वैज्ञानिक कारण
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने ऑक्सीडोस्क्वालेन साइक्लेज नामक जीन परिवार की पहचान की, जो ट्राइटरपेन्स जैसे प्राकृतिक यौगिकों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही यौगिक इमली की खास सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। इसके अलावा एल-आइडोनेट डिहाइड्रोजनेज (L-IDH) एंजाइम से जुड़े एक अहम जीन की भी पहचान हुई है। माना जाता है कि यही जीन इमली में टार्टरिक एसिड की अधिक मात्रा बनने का कारण है, जो उसे उसका खास चटपटा और खट्टा स्वाद देता है।
कृषि और दवा उद्योग को मिलेगा फायदा
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस शोध से भविष्य में इमली की ऐसी नई किस्में विकसित की जा सकेंगी जिनमें बेहतर गुणवत्ता, अधिक उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और जलवायु परिवर्तन का सामना करने की बेहतर ताकत होगी। साथ ही इमली के औषधीय गुणों के आधार पर नई दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों के विकास का रास्ता भी खुलेगा।
किसानों की आय बढ़ाने में भी मिलेगी मदद
भारत में इमली केवल एक फल नहीं, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में लोग इमली के संग्रह और व्यापार से जुड़े हैं। ऐसे में यह शोध किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में भी मददगार साबित हो सकता है।
भारतीय विरासत और आधुनिक विज्ञान का संगम
इमली के जीनोम का यह खाका केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संगम का भी प्रतीक है। इससे भविष्य में खाद्य, कृषि और औषधि क्षेत्र में नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है। भारतीय वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि प्रकृति के इस अनमोल उपहार को समझने और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक उपयोगी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
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