ईरान की महिला कबड्डी टीम को एशियाई खेलों की तैयारी

युद्ध के बीच ईरान की महिला कबड्डी टीम ने बदले तीन शिविर, मनोवैज्ञानिक की ली मदद

ईरान टीम नहीं खेल सकी एक भी दोस्ताना मैच (File Photo)

नागोया: ईरान की महिला कबड्डी टीम ने तीन बार शिविर बदले, छह महीने में दस अलग अलग जगहों पर अभ्यास किया और अपने खिलाड़ियों का फोकस बनाए रखने के लिए मनोवैज्ञानिक की मदद ली, क्योंकि युद्ध की वजह से खिलाड़ियों की एशियाई खेलों के लिए तैयारियों में बाधा पैदा हो रही थी। ईरान के कोच गुलाम रजा मजांदरानी ने भारत के खिलाफ फाइनल में मिली हार के बाद कहा, हमनें एक मनोवैज्ञानिक की मदद ली जिसने युद्ध के दौरान खिलाड़ियों को फोकस बनाये रखने में सहायता की। 

युद्ध के बीच खिलाड़ियों की तैयारी चुनौतीपूर्ण

उन्होंने कहा, यह आसान नहीं है। आप साथ में तैयारी करते हैं, एक तरफ युद्ध छिड़ा है। आपका परिवार खतरे में है, लेकिन आपको खेल पर फोकस रखना है। प्रो कबड्डी लीग में मुंबई टीम के साथ जुड़े 50 बरस के मजांदरानी ने कहा, सभी खिलाड़ी रोज अपने परिवार को फोन करते हैं और पूछते हैं कि वे सुरक्षित हैं या नहीं। उन्होंने कहा, पिछले छह महीने में हमने दस शिविर लगाए। तीन बार जगह बदलनी पड़ी। बार-बार जगह बदलने से सुविधाओं के अभाव से भी टीम को जूझना पड़ा। 

युद्ध और पाबंदियों के कारण ईरान टीम एक भी दोस्ताना मैच नहीं खेल सकी

कोच ने कहा, मेरे पास टीम तैयार करने के लिए छह महीने का ही समय था। इस बीच युद्ध छिड़ गया और दो महीने में सब कुछ खत्म हो गया। हमारे पास बहुत ही कम समय था। उन्होंने कहा कि ईरान पर लगाई गई पाबंदियों के कारण दूसरी टीमों को वहां खेलने नहीं बुलाया जा सका और ईरान की टीम बाहर नहीं जा सकी। मजांदरानी ने कहा, चीनी ताइपै को बुलाने पर वे नहीं आ सकते और हम भी नहीं जा सकते थे। भारत को बुलाने पर वे नहीं आएंगे और आप नहीं जा सकते। जापान के साथ भी ऐसा था तो हमने एक भी दोस्ताना मैच नहीं खेला।

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