पैराग्वे ने ऐतिहासिक उलटफेर करते हुए पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराया
मैसाचुसेट्स,(अमेरिका)। फीफा विश्व कप में पहली बार जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में हारना पड़ा। इससे पहले उसने अपने चारों शूटआउट जीते थे। ऑप्टाजो के अनुसार, "किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में पेनल्टी शूटआउट में यह उसकी केवल दूसरी हार थी। इससे पहले उसे 1976 यूईएफए यूरोपीय चैम्पियनशिप के फाइनल में चेकोस्लोवाकिया के खिलाफ 5-3 से हार मिली थी।"
आधुनिक विश्व कप इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर
पैराग्वे की यह जीत आधुनिक फीफा विश्व कप इतिहास के सबसे यादगार उलटफेरों में गिनी जाएगी। मुकाबले से पहले जर्मनी फीफा विश्व रैंकिंग में 10वें और पैराग्वे 41वें स्थान पर था, यानी दोनों टीमों के बीच 31 रैंक का अंतर था। 1994 के बाद से विश्व कप के नॉकआउट चरण में इससे बड़ा रैंकिंग अंतर केवल तीन मौकों पर देखने को मिला है—2018 में रूस ने स्पेन को हराया था, जब दोनों के बीच 60 स्थानों का अंतर था। वहीं 2002 विश्व कप में दक्षिण कोरिया ने इटली को (34 स्थान का अंतर) और बाद में क्वार्टर फाइनल में स्पेन (32 स्थान का अंतर) को बाहर कर इतिहास रचा था।
जर्मनी का विश्व कप का सपना राउंड ऑफ 32 में ही समाप्त
चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी का 2026 फीफा विश्व कप अभियान राउंड ऑफ 32 में ही समाप्त हो गया। पैराग्वे ने शानदार प्रदर्शन के दम पर विश्व फुटबॉल के सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया। पेनल्टी और रोमांच से भरपूर इस मुकाबले में 120 मिनट तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं, जिसके बाद फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ।
फाउल पाए जाने के कारण रेफरी ने गोल किया रद्द
अतिरिक्त समय के दौरान जर्मनी को लगा, कि जोनाथन टाह के गोल ने उन्हें जीत दिला दी है, लेकिन वीएआर समीक्षा में गोल से पहले फाउल पाए जाने के कारण रेफरी ने गोल रद्द कर दिया। इसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में पहुंचा, जहां जर्मनी तीन अहम पेनल्टी को गोल में नहीं बदल सका। दूसरी ओर, दक्षिण अमेरिकी टीम पैराग्वे ने दबाव में भी संयम बनाए रखा और पेनल्टी शूटआउट 4-3 से अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ पैराग्वे ने न सिर्फ चार बार की चैंपियन जर्मनी को टूर्नामेंट से बाहर किया, बल्कि अगले दौर में अपनी जगह भी पक्की कर ली। (एएनआई)
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