उबर चालक से एशियाई खेलों के पदक विजेता तक, रोइंग खिलाड़ी सलमान खान की संघर्ष और सफलता की कहानी
नागोया: एशियाई खेलों में पुरुष डबल स्कल्स में भारत को ऐतिहासिक कांस्य पदक दिलाने वाली जोड़ी के सदस्य सलमान खान नौ साल पहले दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर उबर कैब चलाते थे। अब उनके हाथों में स्टीयरिंग की जगह पतवार है। सलमान और सतनाम सिंह ने बृहस्पतिवार को एशियाई खेलों में पुरुष डबल स्कल्स में कांस्य पदक के रूप में भारत का पहला पदक जीता, लेकिन इससे पहले सलमान अपने पिता के निधन के बाद परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अपनी वैगनआर कार को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दिन-रात चलाते थे।
पिता के निधन के बाद कैब चलाते थे सलमान
सलमान ने भारत के लिए रोइंग में एकमात्र पदक जीतने के बाद पीटीआई से कहा, हां 2016 में मेरे पिता के निधन के बाद मुझे अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी, क्योंकि मैं सबसे बड़ा भाई हूं। इसलिए मैंने वैगनआर से उबर चालक के तौर पर काम किया। उन्होंने कहा, मैंने यह काम 2017 में सिर्फ एक साल किया। उबर चालक के रूप में काम करने के साथ-साथ मैं भारतीय सेना में भर्ती के लिए आवेदन पत्र भी भरता रहता था। एक साल बाद सलमान भारतीय सेना में भर्ती हो गए जो उनके लिए एक सपना पूरा होने जैसा था, क्योंकि उनके दिवंगत पिता चाहते थे कि वह सेना में शामिल हों।
सेना का भी रहे हिस्सा
उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले इस रोइंग खिलाड़ी ने कहा, मेरे पिता का सपना था कि मैं भारतीय सेना का हिस्सा बनूं और मैं उसे पूरा कर सका। उन्होंने कहा, भारतीय सेना में शामिल होने के कारण मैंने रोइंग शुरू की और आज मैं यहां हूं। अब 28 वर्षीय सलमान ने एशियाई खेलों का अपना पहला पदक जीता। रोइंग में उनका सफर 2018 में भारतीय सेना के बॉम्बे इंजीनियरिंग ग्रुप में शामिल होने के बाद शुरू हुआ। कोच सत्यवान, सतीश सिरात और प्रभात मिश्रा ने उन्हें रोइंग से परिचित कराया और केंद्र की टीम के लिए उनका चयन किया।
अंतिम समय के बदलावों से स्वर्ण चूके
रोइंग टीम को लेकर हुए विवाद पर सलमान ने कहा कि अंतिम समय में टीम के सदस्यों में बदलाव का खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ा। सलमान ने कहा, अगर हमने लंबे समय तक साथ में अभ्यास किया होता तो हम स्वर्ण पदक जीतते। चीन की टीम स्वर्ण पदक की हकदार नहीं थी। उन्होंने कहा, सब कुछ अचानक हुआ, लेकिन अब इन सब बातों को कहने का कोई मतलब नहीं है। यह मेरे हाथ में नहीं था।
ये भी पढ़ें- स्कीट निशानेबाजी में भारत का शानदार प्रदर्शन, पुरुष और महिला टीमों ने जीते ऐतिहासिक कांस्य पदक