भारतीय मुक्केबाज और राष्ट्रमंडल खेल 2026 की स्वर्ण

"सपने जैसा लग रहा है", साक्षी चौधरी ने CWG 2026 में भारत के ऐतिहासिक 10 बॉक्सिंग पदकों को बताया बड़ी उपलब्धि

Sakshi Chaudhary Makes Boxing History

नई दिल्ली: भारतीय मुक्केबाज और राष्ट्रमंडल खेल 2026 की स्वर्ण पदक विजेता साक्षी चौधरी ने ग्लासगो में हुए प्रतिष्ठित खेलों में भारत के ऐतिहासिक प्रदर्शन को "सपने जैसा" बताया। भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी में रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते, जिसमें सात स्वर्ण पदक शामिल हैं।

साक्षी ने जीता शानदार स्वर्ण पदक

साक्षी चौधरी ने महिला 51 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके शानदार प्रदर्शन ने भारतीय मुक्केबाजी अभियान को नई ऊंचाई दी। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत ने मुक्केबाजी में सात स्वर्ण सहित कुल 10 पदक हासिल किए, जो किसी भी देश का एक संस्करण में अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। इससे पहले किसी भी देश ने राष्ट्रमंडल खेलों के एक ही संस्करण में मुक्केबाजी में इतने स्वर्ण पदक नहीं जीते थे।

इन खिलाड़ियों ने भी जीते स्वर्ण पदक

साक्षी चौधरी के अलावा विश्व चैंपियन जैस्मीन लैंबोरिया, प्रीति पवार (54 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) ने भी स्वर्ण पदक जीते। वहीं लवलीना बोरगोहेन, जदुमणि सिंह और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक हासिल कर भारतीय मुक्केबाजी के ऐतिहासिक अभियान को पूरा किया।

दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत

4 अगस्त को साक्षी चौधरी और भारतीय मुक्केबाजी दल के अन्य खिलाड़ियों का दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। साक्षी ने कहा, "यह एक सपने जैसा लगता है और आप सभी हमारा स्वागत करने आए हैं। हम बहुत खुश हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। हमने 10 पदक जीते हैं, जिनमें से 7 स्वर्ण पदक हैं। यह अपने आप में एक इतिहास है। अब एशियाई खेल हैं और हम उनकी तैयारी करेंगे।"

फाइनल मुकाबले में दिखा साक्षी का दबदबा

इंग्लैंड की रूबी व्हाइट के खिलाफ फाइनल मुकाबले में साक्षी शुरुआत से ही आक्रामक नजर आईं। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी के हमलों को रोकते हुए शानदार जवाबी मुक्के लगाए। खासतौर पर उनके दाहिने हाथ के पंच ने मुकाबले में अहम भूमिका निभाई। रूबी ने आखिरी दौर में वापसी की कोशिश की, लेकिन साक्षी ने अपना संयम बनाए रखा और सर्वसम्मत फैसले से जीत हासिल की।

साक्षी के लिए शानदार रहा साल

इस जीत के साथ साक्षी के लिए यह साल बेहद यादगार बन गया। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए क्वालीफाई करने के लिए अपना वजन वर्ग बदला और राष्ट्रीय चयन ट्रायल में दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन को हराया। इस साल की शुरुआत में साक्षी ने अस्ताना में अमेरिका की योसेलीन पेरेज़ को हराकर विश्व बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने चेकिया में ग्रैंड प्रिक्स उस्ती नाद लाबेम में भी स्वर्ण पदक जीता। साक्षी पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन और दो बार की विश्व युवा चैंपियन भी रह चुकी हैं।

(एएनआई)

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