सिंगरौली जिला अस्पताल में इलाज के दौरान 1 साल के ब

सिंगरौली जिला अस्पताल में 1 साल के मासूम की मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

1-Year-Old Dies at Singrauli Hospital, Raises Health System Concerns

सिंगरौली (मध्य प्रदेश)। जिले के मुख्य चिकित्सालय सह ट्रॉमा सेंटर में बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और लचर व्यवस्था के चलते एक 1 साल के मासूम बच्चे की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खोल दी है।

रेफर पर्ची पर परिजनों का गुस्सा

​परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर गंभीर हालत देखकर केवल रेफर पर्ची थमा देते हैं और अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह पल्ला झाड़ लेते हैं। जब परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और डॉक्टर के रवैये पर सवाल उठाए, तो वहां मौजूद नर्सों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी।

​अधिकारियों के दौरों पर उठे सवाल

दिलचस्प बात यह है कि ठीक इसी दिन अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए भोपाल से संयुक्त संचालक (जॉइंट डायरेक्टर) जिला अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि अधिकारी केवल वीआईपी मेहमाननवाजी, चाय-नाश्ते और खाने-पीने की व्यवस्थाओं में उलझकर रह गए और औपचारिकता पूरी कर वापस भोपाल लौट गए। उन्होंने एक बार भी वार्डों में जाकर मरीजों और उनके तीमारदारों की समस्याओं को जानने की जहमत तक नहीं उठाई।

​रीवा रेफर को लेकर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों के मन में अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब जिले में जिला अस्पताल के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज भी संचालित है, तो फिर गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बार-बार रीवा क्यों रेफर किया जाता है? क्या यहां के संसाधन केवल कागजों तक सीमित हैं?

वीआईपी दौरों के बीच बदहाल स्वास्थ्य सेवा

​यही नहीं, कुछ दिन पहले जिले की प्रभारी मंत्री भी सिंगरौली दौरे पर आई थीं, जो एनटीपीसी के सूर्या भवन और आसपास की वीआईपी गलियों में घूमकर वापस भोपाल लौट गईं। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की इस उदासीनता के कारण आम जनता भगवान भरोसे जीने को मजबूर है और सिंगरौली स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। 

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